धमतरी। तीर्थयात्रियों को विशाखापटनम आरटीओ द्वारा बंधक बनाए जाने के मामल में सोशल मीडिया में चल रही खबर महज अफवाह निकली. यात्रियों को किसी ने बंधक नहीं बनाया था बल्कि आरटीओ द्वारा बगैर परमिट के चल रही गाड़ी का चालान बनाया गया था.
दरअसल  विशाखापटनम आरटीओ ने यात्री बस के कागजात व अंतर्राज्यीय परमिट के संबंध में पूछताछ के लिए गाड़ी रुकवाई थी. वैध कागजात न होने पर आरटीओ ने एक लाख 40 हजार रुपए का जुर्माना लगाया था. आरटीओ ने किसी भी यात्री को बंधक नहीं बनाया था. यात्री कहीं भी आने-जाने के लिए स्वतंत्र थे. हालांकि इस दौरान यात्रियों को काफी तकलीफ उठानी पड़ी क्योंकि न तो बस वाले के पास और न ही यात्रियों के पास इतने पैसे थे कि जुर्माने की राशि तत्काल जमा की जा सके.
दरअसल 8 सितंबर को सिहावा के वनाचंल इलाके से 40 यात्री धार्मिक यात्रा पर निकले हुए निकले थे और तिरूपति एवं रामेश्वरम में भगवान के दर्शन के बाद लौट रहे थे. इसी दरम्यान आंध्रप्रदेश सीमा के बैरियर पर यात्रियों से भरी बस को आरटीओ के कर्मचारियों ने रोक लिया गया. बताया जा रहा है कि यात्रा में जाते वक्त आंध्रप्रदेश की सीमा तो पार कर लिया गया था लेकिन उस समय कोई चेकिंग नहीं हो रही थी.  वापसी के दौरान चेकिंग किया गया तो बस का परमिट नही था. जिस पर आरटीओ ने चालान काटकर कोर्ट में पेश कर दिया.
दर्शन से लौट रहे कुछ बुजुर्ग यात्रियों ने एक वीडियों के माध्यम से रमन सरकार से गुहार लगाई कि उन्हें किसी तरह यहां से उनके घर सकुशल पहुंचा दे और वीडियो में ये भी कहा गया कि उनके दो साथी बीमार हो गए है क्योंकि उनके पास खाने पीने का राशन खत्म हो चुका है.  यात्रियों के वीडियो वायरल के बाद जिला प्रशासन ने मामले को संज्ञान में लिया और स्थानीय प्रशासन से बातचीत की जिसके यात्रियों के लिए भोजन की व्यवस्था किया गया है और अब यात्रियों को वापस लाने के लिए तैयारी की जा रही है. सम्भवतः देर शाम की ट्रेन से रवाना भी कर दिया जाएगा.