केंद्र सरकार ने राजधानी दिल्ली में ट्रैफिक व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS) लगाने की मंजूरी दी है। इस परियोजना पर करीब 1,790 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसका उद्देश्य दिल्ली के प्रमुख चौराहों और सिग्नलों पर लगने वाले जाम को कम करना और यातायात को अधिक सुचारु बनाना है। ITMS के जरिए ट्रैफिक सिग्नलों और वाहनों की आवाजाही को तकनीक की मदद से मैनेज किया जाएगा। इससे सिग्नल पर वाहनों को अनावश्यक रूप से लंबे समय तक रुकने की स्थिति कम होने की उम्मीद है। ट्रैफिक के दबाव के अनुसार व्यवस्था को बेहतर तरीके से संचालित करने में भी मदद मिलेगी। इस सिस्टम के लागू होने से वाहन चालकों के यात्रा समय और ईंधन की बचत होने की उम्मीद है। बार-बार सिग्नल पर रुकने और ट्रैफिक जाम में वाहनों के फंसे रहने की समस्या कम होने से लोगों को राहत मिल सकती है।

प्रदूषण कम करने में भी मिलेगी मदद

दिल्ली में वाहनों की बढ़ती संख्या के बीच ट्रैफिक जाम वायु प्रदूषण की एक बड़ी वजह है। ITMS के जरिए यातायात को सुचारु बनाने से वाहनों के अनावश्यक रूप से खड़े रहने का समय घट सकता है। इससे ईंधन की खपत के साथ वाहनों से होने वाले प्रदूषण में कमी लाने में भी मदद मिलने की उम्मीद है।

केंद्रीय मंत्रिमंडल से इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS) को मंजूरी मिलने के बाद केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इसकी कार्यप्रणाली के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि दिल्ली में फिलहाल 1,529 ट्रैफिक सिग्नल हैं, जो पहले से निर्धारित टाइमिंग के आधार पर संचालित होते हैं। अश्विनी वैष्णव के मुताबिक, मौजूदा व्यवस्था में अगर किसी सिग्नल पर रेड लाइट के लिए 30-35 सेकेंड निर्धारित हैं, तो ट्रैफिक की स्थिति बदलने के बावजूद सिग्नल उतने ही समय तक रेड रहता है। यानी जिस दिशा में ज्यादा वाहन हों और दूसरी दिशा में कम ट्रैफिक हो, दोनों के लिए टाइमिंग पहले से तय रहती है।

ज्यादा ट्रैफिक वाली दिशा में कम होगा इंतजार

ITMS लागू होने के बाद ट्रैफिक सिग्नल को ट्रैफिक की वास्तविक स्थिति के अनुसार टाइमिंग बदलने में सक्षम बनाया जाएगा। अगर किसी दिशा से ज्यादा वाहन आ रहे हैं, तो उस दिशा के लिए रेड लाइट का समय कम किया जा सकेगा। वहीं, जिस दिशा में ट्रैफिक कम होगा, वहां रेड लाइट अपेक्षाकृत ज्यादा समय तक रह सकती है। इस तरह सिग्नल की टाइमिंग को ट्रैफिक के दबाव के हिसाब से एडजस्ट किया जा सकेगा। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि ITMS के जरिए इस तरह की इंटेलिजेंट ट्रैफिक व्यवस्था संभव होगी। केंद्र सरकार इस पूरी परियोजना पर करीब 1,790 करोड़ रुपये खर्च करेगी।

24 महीने में तीन फेज में पूरा होगा ITMS प्रोजेक्ट

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव के मुताबिक, दिल्ली में इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS) की पूरी परियोजना को 24 महीने में तीन चरणों में लागू किया जाएगा। इसके तहत चरणबद्ध तरीके से प्रमुख कॉरिडोर और ट्रैफिक सिग्नलों को स्मार्ट बनाया जाएगा। पहला चरण 12 महीने में पूरा किया जाएगा। इसमें 5 कॉरिडोर पर 250 स्मार्ट ट्रैफिक सिग्नल लगाए जाएंगे। इसी चरण में परियोजना के लिए मुख्य कमांड सेंटर भी तैयार किया जाएगा।

इसके बाद दूसरे चरण की अवधि छह महीने होगी। इसमें 222 और स्मार्ट सिग्नल लगाए जाएंगे। साथ ही किसी आपदा या तकनीकी समस्या की स्थिति में व्यवस्था को चालू रखने के लिए डिजास्टर रिकवरी सिस्टम तैयार किया जाएगा।  तीसरा और अंतिम चरण भी छह महीने में पूरा होगा। इसमें 30 कॉरिडोर के बाकी 620 ट्रैफिक सिग्नलों को स्मार्ट बनाया जाएगा। इस तरह तीनों चरण पूरे होने के बाद दिल्ली में ट्रैफिक सिग्नल व्यवस्था को ITMS से जोड़ने का काम पूरा हो जाएगा।

ITMS से ट्रैफिक मैनेजमेंट के साथ सुरक्षा भी होगी मजबूत

दिल्ली में इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS) लागू होने के बाद ट्रैफिक सिग्नलों पर आवाजाही आसान बनाने के साथ-साथ सड़क सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है। इस सिस्टम में CCTV कैमरों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल किया जाएगा।

ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों पर नजर

CCTV और AI तकनीक की मदद से ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों की पहचान करना आसान होगा। इससे यातायात नियमों के पालन की निगरानी को बेहतर किया जा सकेगा। वहीं, किसी आपातकालीन स्थिति में भी कैमरों और कमांड सेंटर के जरिए स्थिति पर नजर रखने और कार्रवाई में मदद मिल सकती है। ITMS के जरिए चोरी किए गए वाहनों और अन्य वांछित वाहनों की पहचान और ट्रैकिंग में भी मदद मिलने की उम्मीद है। कैमरों के नेटवर्क के माध्यम से सड़कों पर गुजरने वाले वाहनों की निगरानी अधिक प्रभावी तरीके से की जा सकेगी।

समय और ईंधन की होगी बचत

सिस्टम का एक प्रमुख फायदा ट्रैफिक के दबाव के अनुसार सिग्नल की टाइमिंग को बदलना होगा। अधिक ट्रैफिक वाले रास्तों पर वाहनों को सिग्नल पर कम समय तक रोकने से यात्रा समय और ईंधन की बचत हो सकती है। जाम और सिग्नल पर लंबे समय तक वाहनों के खड़े रहने से ईंधन की खपत और वाहनों से निकलने वाले उत्सर्जन में बढ़ोतरी होती है। ITMS के जरिए ट्रैफिक फ्लो बेहतर होने से वाहनों के अनावश्यक इंतजार को कम किया जा सकेगा। इससे वायु प्रदूषण कम करने में भी मदद मिलने की उम्मीद है।

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