पटना। अंगदान के क्षेत्र में बिहार एक बार फिर प्रेरणादायक मिसाल बना है। AIIMS पटना में एक 50 वर्षीय ब्रेन-डेड व्यक्ति के परिजनों ने गहरी शोक संवेदना के बीच अंगदान का ऐतिहासिक और मानवीय निर्णय लिया। यह राज्य में किसी ब्रेन-डेड मरीज द्वारा किया गया चौथा सफल अंगदान है, जिसने जरूरतमंदों के लिए जीवन की नई उम्मीद जगाई है।
दुखद दुर्घटना और चिकित्सीय प्रयास
मूल रूप से पीड़ित 50 वर्षीय नरोत्तम कुमार को 28 सितंबर 2026 को घर की चार सीढ़ियों से फिसलकर गिरने के बाद गंभीर हालत में AIIMS पटना में भर्ती कराया गया था। जांच में उनके मस्तिष्क के फ्रंटल क्षेत्रों में गंभीर कंट्यूजन, सबड्यूरल हेमरेज, पैराइटल हेमरेज और मिडलाइन शिफ्ट की पुष्टि हुई। उन्हें तुरंत गहन चिकित्सा कक्ष (ICU) में रखकर लगातार पांच दिनों तक वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया।
ब्रेन-स्टेम डेथ की पुष्टि और काउंसलिंग
चिकित्सकीय प्रोटोकॉल का कड़ाई से पालन करते हुए डॉक्टरों की टीम ने ब्रेन-स्टेम डेथ का आकलन किया। इसके तहत 1 और 2 अक्टूबर 2026 को दो बार एपनिया टेस्ट किया गया, जिसके बाद आधिकारिक रूप से ब्रेन-स्टेम डेथ की पुष्टि की गई। AIIMS पटना की ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेशन टीम ने इस कठिन समय में परिवार की उचित काउंसलिंग की। परिवार ने दुःख की घड़ी से ऊपर उठकर मानवता की मिसाल पेश की और लिवर, दोनों किडनी तथा दोनों कॉर्निया के दान के लिए लिखित सहमति दी।
सफल अंग रिट्रीवल और टीम का योगदान
AIIMS पटना के निर्धारित दिशा-निर्देशों के तहत अंगों को सुरक्षित रूप से निकालने (रिट्रीवल) की प्रक्रिया पूरी की गई। दान किए गए इन अंगों का आवंटन नियमानुसार प्रतीक्षा सूची में शामिल उपयुक्त मरीजों के लिए किया जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया को सफल बनाने में AIIMS पटना की मेडिकल, नर्सिंग, ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेशन टीम और SOTO बिहार की टीम ने बेहतरीन समन्वय और अथक प्रयास किया।

