परवेज आलम, बेतिया। पश्चिमी चंपारण जिले में गंडक नदी की उफनती लहरों ने एक बार फिर तबाही मचाई है, जिससे कई इलाके बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। इस आपदा की घड़ी में बाढ़ पीड़ितों की सहायता के लिए केंद्र सरकार आगे आई है। कोयला एवं खनन मंत्रालय के केंद्रीय राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे ने बेतिया से राहत सामग्री से भरे 30 वाहनों के काफिले को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह पहल प्रभावित परिवारों के लिए एक बड़ी राहत बनकर आई है।
BCCL के सहयोग से पहुंची राहत सामग्री
जैसे ही पश्चिमी चंपारण में बाढ़ की विभीषण स्थिति की जानकारी केंद्रीय मंत्री को मिली, उन्होंने तुरंत सक्रियता दिखाई। उन्होंने कोयला मंत्रालय के अंतर्गत आने वाली प्रतिष्ठित कंपनी भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (BCCL) के साथ सीधा समन्वय स्थापित किया। मंत्री के विशेष प्रयासों के बाद पटना से राहत सामग्री से लदे 30 वाहनों को सीधे चंपारण पहुंचाया गया है। इस राहत सामग्री में सूखा राशन, दैनिक उपयोग की जरूरी वस्तुएं और अन्य आवश्यक सामग्रियां शामिल हैं, जो आपदा पीड़ितों के लिए इस समय जीवन रेखा साबित होंगी।


प्रशासन और स्वयं सहायता समूहों के जरिए होगा वितरण
बेतिया में आयोजित हरी झंडी दिखाने के इस कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री ने वितरण की रूपरेखा पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने स्पष्ट किया कि राहत सामग्री का यह वितरण पूरी पारदर्शिता के साथ प्रशासन और स्थानीय स्वयं सहायता समूहों (SHGs) के माध्यम से किया जाएगा। राहत सामग्री को प्रखंडवार बांटा जाएगा ताकि जिले के सुदूर और सबसे अधिक प्रभावित गांवों के हर एक पीड़ित परिवार तक समय रहते जरूरी सामान पहुंच सके।
इस महत्वपूर्ण अवसर पर क्षेत्र के कई दिग्गज नेता और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे, जिनमें मुख्य रूप से:
- बिहार सरकार के मंत्री नंदकिशोर राम
- लौरिया के लोकप्रिय विधायक विनय बिहारी
- बगहा के विधायक राम सिंह
- भाजपा बगहा जिलाध्यक्ष अचिंत्य कुमार
- बेतिया जिलाध्यक्ष रूपक श्रीवास्तव
इनके अलावा भारतीय जनता पार्टी के कई अन्य वरिष्ठ पदाधिकारी और कार्यकर्ता भी कार्यक्रम में उपस्थित रहकर राहत अभियान को सफल बनाने में जुटे नजर आए।
चंपारण मेरा परिवार है, हर संकट में साथ खड़े हैं
राहत वाहनों को रवाना करने के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए केंद्रीय राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे ने बेहद भावुक और संवेदनशील बयान दिया। उन्होंने कहा कि चंपारण मेरे लिए केवल एक कार्यक्षेत्र नहीं, बल्कि मेरा अपना परिवार है। उन्होंने जोर देकर कहा कि आपदा की इस विकट घड़ी में यहां के प्रत्येक बाढ़ प्रभावित परिवार के साथ चट्टान की तरह खड़े रहना उनका नैतिक कर्तव्य और पहली प्राथमिकता है। सरकार की ओर से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि प्रभावित लोगों को भोजन, सुरक्षा और हरसंभव मदद तुरंत मिले।

