अमृतसर. शिरोमणि अकाली दल के विभिन्न गुटों के नेताओं के बीच मीडिया में एक-दूसरे के खिलाफ चल रही बयानबाज़ी पर सख्त नज़र रखते हुए, अकाल तख़्त के जथेदार ज्ञानी रघबीर सिंह ने चेतावनी दी है कि जब तक शिरोमणि अकाली दल का मामला अकाल तख़्त साहिब में विचाराधीन है, तब तक कोई भी नेता एक-दूसरे पर टिप्पणी नहीं करेगा. ऐसा करने को अकाल तख़्त साहिब के आदेशों का उल्लंघन माना जाएगा.
ज्ञानी रघबीर सिंह ने सिख नेताओं को सख्त निर्देश दिए कि वे अकाल तख़्त साहिब की सर्वोच्चता, सम्मान, मर्यादा और सिद्धांतों का पालन करते हुए तुरंत बयानबाज़ी बंद करें. अगर ऐसा नहीं हुआ, तो इसे सिख सिद्धांतों, परंपराओं और मर्यादा का उल्लंघन मानते हुए संबंधित नेताओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.

1 जुलाई 2024 को अकाली दल के बागी गुट के नेताओं ने अकाल तख़्त साहिब के जथेदार द्वारा पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखबीर बादल को तंख़ैया करार दिए जाने के बाद से सार्वजनिक रूप से आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला जारी है. इनमें से प्रमुख मांग सुखबीर बादल को पद से हटाने की थी, जिन्हें 30 अगस्त को अकाल तख़्त साहिब से तंख़ैया करार दिया गया. सुखबीर ने पिछली अकाली सरकार के दौरान हुई गलतियों को स्वीकार करते हुए 31 अगस्त को अकाल तख़्त साहिब के सचिवालय में लिखित माफ़ीनामा सौंपा.
अकाल तख़्त के जथेदार ने 30 अगस्त को अकाली दल के बागी गुट के नेताओं और पिछले अकाली सरकार के मंत्रियों को 15 दिनों के भीतर अकाली सरकार के दौरान हुई गलतियों का स्पष्टीकरण देने के आदेश दिए हैं. इस सूची में परमिंदर सिंह ढींडसा, बीबी जगीर कौर और मनप्रीत बादल का नाम भी शामिल है.
31 अगस्त को चार पूर्व मंत्रियों, जिनमें डॉ. दलजीत सिंह चीमा, शरणजीत सिंह ढिल्लों, महेशिंदर सिंह गरेवाल, और गुलज़ार सिंह रानीके ने सुखबीर बादल के माफ़ीनामे के साथ अपना लिखित स्पष्टीकरण अकाल तख़्त साहिब के सचिवालय में जमा किया. अब बचे हुए 13 पूर्व मंत्रियों, जिनमें बिक्रम मजीठिया, बीबी जगीर कौर और मनप्रीत बादल भी शामिल हैं, को 15 दिनों के भीतर व्यक्तिगत रूप से अकाल तख़्त साहिब में पेश होकर अपना स्पष्टीकरण देना होगा.
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