गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में सड़क दुर्घटना में घायल मरीज की इलाज के दौरान मौत के बाद परिजनों और जूनियर डॉक्टरों के बीच विवाद हो गया. अस्पताल प्रशासन ने मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय उच्च स्तरीय कमेटी गठित की है.
गोरखपुर. बीआरडी मेडिकल कॉलेज में इलाज के दौरान एक मरीज की मौत के बाद परिजनों और जूनियर डॉक्टरों के बीच मारपीट का मामला सामने आया है. घटना मेडिसिन इमरजेंसी के वार्ड नंबर 11 की बताई जा रही है, जहां मंगलवार देर रात सड़क दुर्घटना में घायल 45 वर्षीय उमाकांत चौधरी की मौत हो गई. घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है. मामले की जांच के लिए अस्पताल प्रशासन ने तीन सदस्यीय उच्च स्तरीय कमेटी गठित की है.
सड़क हादसे में घायल थे
संतकबीर नगर के तेनुहारी सोयम गांव निवासी उमाकांत चौधरी सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हुए थे. जिला अस्पताल से रेफर किए जाने के बाद उन्हें बीआरडी मेडिकल कॉलेज की मेडिसिन इमरजेंसी के वार्ड नंबर 11 में भर्ती कराया गया था, जहां उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई.
परिजनों का आरोप है कि मौत के बाद ड्यूटी पर मौजूद जूनियर डॉक्टरों ने बिना पोस्टमार्टम कराए डेथ सर्टिफिकेट दे दिया और शव ले जाने के लिए कहा. चूंकि मामला सड़क दुर्घटना से जुड़ा था, इसलिए परिजन कानूनी प्रक्रिया के तहत पोस्टमार्टम कराने की मांग कर रहे थे.
पोस्टमार्टम को लेकर विवाद
पोस्टमार्टम की मांग को लेकर दोनों पक्षों के बीच कहासुनी शुरू हुई. आरोप है कि विवाद बढ़ने के बाद जूनियर डॉक्टरों ने वार्ड नंबर 11 की गैलरी का चैनल गेट अंदर से बंद कर दिया और परिजनों के साथ मारपीट की.
घटना के दौरान अस्पताल परिसर में अफरा-तफरी की स्थिति बन गई. बताया गया कि कुछ मरीज भी वहां से भागने लगे. घटना की जानकारी मिलने के बाद बड़ी संख्या में पुलिस बल मौके पर पहुंचा और काफी मशक्कत के बाद दोनों पक्षों के बीच विवाद शांत कराया.
पुलिस की मौजूदगी में कार्रवाई
पुलिस की मौजूदगी में पोस्टमार्टम से जुड़ी कागजी कार्रवाई पूरी की गई और शव को मोर्चरी हाउस भेजा गया. इसके बाद बुधवार सुबह करीब 7 बजे स्थिति सामान्य हुई.
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के प्रमुख अधीक्षक डॉ. अशोक यादव ने कहा कि घटना की पूरी जानकारी प्रशासन को है. उन्होंने बताया कि निष्पक्ष जांच के लिए तीन सदस्यीय उच्च स्तरीय कमेटी गठित की गई है और अस्पताल में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी निकाली जा रही है.
उन्होंने कहा कि जांच में यदि कोई जूनियर डॉक्टर दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक और कानूनी कार्रवाई की जाएगी.

