लखनऊ. उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले पोस्टर के जरिए सियासी संदेश देने की होड़ तेज हो गई है. समाजवादी पार्टी के प्रदेश कार्यालय के बाहर अब एक नया पोस्टर लगाया गया है. इसमें सपा प्रमुख अखिलेश यादव को 2027 में फिर मुख्यमंत्री बनाने की बात कही गई है. पोस्टर में दावा किया गया है कि सवर्ण हिंदुओं के सहयोग से अखिलेश यादव की सत्ता में वापसी होगी. इससे पहले भी सपा कार्यालय के बाहर कई पोस्टर लग चुके हैं, जिनमें अखिलेश के समर्थन के साथ विरोधियों पर निशाना साधा गया था.
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सवर्ण हिंदुओं के सहयोग से वापसी का दावा
नए पोस्टर में अखिलेश यादव को 2027 में मुख्यमंत्री के रूप में पेश किया गया है. इसमें सवर्ण हिंदुओं के समर्थन को खास तौर पर रेखांकित किया गया है. पोस्टर को सपा नेता और सेवता प्रभारी डॉ. राहुल शुक्ला ने लगवाया है. पोस्टर में लिखा है- सवर्ण चाह दिखाएगा, पीडीए सीएम बनाएगा. इसके साथ दीपावली और छठ की बधाई दी गई है. पोस्टर में अखिलेश भी नजर आ रहे है, जिसमें वह विधानसभा के बाहर खड़े नजर आ रहे हैं, जहां एक माइलस्टोन भी लगा है, जिस पर जीरे किमी लिखा है. इसे सपा की ओर से नए सामाजिक समीकरण का संदेश देने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है.
पहले लगा था ’27 में श्रीकृष्ण आएंगे’ का पोस्टर
इससे पहले सपा कार्यालय के बाहर ’27 में श्रीकृष्ण आएंगे’ का पोस्टर लगाया गया था. इसमें अखिलेश यादव के साथ भगवान श्रीकृष्ण की तस्वीर थी. यह पोस्टर कथावाचक धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की भगवान श्रीकृष्ण को लेकर की गई टिप्पणी के विरोध के बीच सामने आया था. सपा नेता अब्दुल अजीम मंसूरी ने यह होर्डिंग लगवाया था. एक अन्य पोस्टर में धीरेंद्र शास्त्री की तस्वीर पर क्रॉस का निशान बनाकर विरोध जताया गया था,
‘अंधकार पर प्रहार, अखिलेश हैं तैयार’ का नारा
दिवाली के मौके पर सपा कार्यालय के बाहर एक और पोस्टर लगाया गया. इसमें लिखा था, ‘अंधकार पर प्रहार, अखिलेश हैं तैयार’. सपा नेता इंजीनियर हिमांशु द्विवेदी की ओर से लगाए गए इस पोस्टर में तीन पीढ़ियों को जोड़ने का संदेश दिया गया. इसमें मिलेनियल्स, Gen Z और Gen Alpha का जिक्र किया गया था.
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भाजपा और बसपा के पोस्टरों से भी पलटवार
दूसरी ओर, भाजपा मुख्यालय के बाहर लगे पोस्टर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भगवान राम और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भगवान कृष्ण के रूप में दिखाया गया. इस पर लिखा था, ‘जो राम को लाए थे, वो 27 में कृष्ण को लाएंगे’. वहीं, मायावती के समर्थन में लगे पोस्टरों पर ‘दोगलों से सावधान’ लिखा गया और लाल टोपी के जरिए सपा पर निशाना साधा गया. इस तरह लखनऊ में पोस्टर अब केवल प्रचार का माध्यम नहीं, बल्कि 2027 के चुनाव से पहले राजनीतिक दलों के बीच संदेश और जवाबी संदेश का जरिया बनते जा रहे हैं.

