प्रयागराज. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्कूलों में छात्रों की जन्मतिथि दर्ज करने की प्रक्रिया में गड़बड़ियों पर चिंता जताई है. कोर्ट ने कहा कि उम्र के गलत प्रमाण पत्र के कारण 19-20 साल के युवकों को पॉक्सो एक्ट के मामलों में झूठा फंसाए जाने की आशंका है. इसे रोकने के लिए स्कूलों में दाखिले के समय उम्र का सही रिकॉर्ड रखना जरूरी है.
जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल ने बंटी उर्फ बंशी की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान ये निर्देश दिए. कोर्ट ने बेसिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा को भी इस मामले में तलब किया था.
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स्कूलों में उम्र दर्ज करने की प्रक्रिया पर सवाल
हाईकोर्ट ने कहा कि छात्रों की उम्र दर्ज करते समय सावधानी बरतनी जरूरी है. जन्मतिथि के रिकॉर्ड में गड़बड़ी से कानूनी मामलों में गंभीर समस्याएं पैदा हो सकती हैं. कोर्ट ने स्कूलों में प्रवेश के समय उम्र के प्रमाण की जांच और रिकॉर्ड रखने की व्यवस्था बेहतर बनाने पर जोर दिया.
चार दस्तावेजों में से एक होगा उम्र का प्रमाण
अपर मुख्य सचिव ने कोर्ट को बताया कि 17 सितंबर और 21 अक्टूबर 2026 को हुई विभागीय बैठकों में गाइडलाइन का मसौदा तैयार किया गया है. इसके तहत जन्म प्रमाण पत्र उपलब्ध नहीं होने पर चार दस्तावेजों में से किसी एक को उम्र के प्रमाण के रूप में स्वीकार किया जा सकेगा. इनमें अस्पताल या एएनएम का रिकॉर्ड, आंगनवाड़ी रिकॉर्ड, ग्राम जन्म-मृत्यु पंजी और माता-पिता या अभिभावक का शपथ पत्र शामिल हैं.
प्रवेश पंजिका में दर्ज करना होगा प्रमाण का विवरण
प्रस्तावित दिशा-निर्देशों के अनुसार, स्कूलों को प्रवेश पंजिका में जन्मतिथि के साथ उस दस्तावेज का विवरण भी दर्ज करना होगा, जिसके आधार पर उम्र लिखी गई है. संबंधित कॉलम पर कक्षा अध्यापक के हस्ताक्षर भी होंगे. कोर्ट ने इससे पहले शिवम यादव के मामले में भी ऐसी गाइडलाइन बनाने को कहा था.
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मैनपुरी के मामले में आरोपी को मिली जमानत
यह मामला मैनपुरी के डन्नाहर थाने से जुड़ा है. बंटी पर एक लड़की को बहला-फुसलाकर ले जाने का आरोप था. एफआईआर में लड़की की उम्र 16 साल बताई गई, जबकि स्कूल के प्रमाण पत्र में उसकी उम्र 14 साल से कम दर्ज थी. लड़की ने अपने बयान में उम्र 14 साल बताई और कहा कि वह अपनी मर्जी से आरोपी के साथ गई थी. कोर्ट ने आरोपी का आपराधिक इतिहास नहीं होने, चार्जशीट दाखिल होने और जेल में रहने की अवधि समेत अन्य तथ्यों पर विचार कर सशर्त जमानत मंजूर कर ली.

