कुंदन कुमार/ पटना। बिहार विधानसभा के बजट सत्र के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। हालिया विवाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी द्वारा इस्तेमाल किए गए शब्द ‘बपौती’ को लेकर शुरू हुआ है। राजद के वरिष्ठ नेता और विधायक आलोक मेहता ने इस पर कड़ा ऐतराज जताते हुए इसे संसदीय मर्यादा के खिलाफ बताया है।

​नेता प्रतिपक्ष के सम्मान पर हमला

​आलोक मेहता ने मीडिया से मुखातिब होते हुए कहा कि सदन के भीतर जिस तरह की भाषा का प्रयोग नेता प्रतिपक्ष के लिए किया जा रहा है, वह बेहद चिंताजनक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि लोकतंत्र में मतभेद हो सकते हैं, लेकिन व्यक्तिगत आक्षेप और अमर्यादित शब्दों के लिए कोई स्थान नहीं होना चाहिए। मेहता के अनुसार, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने जिस लहजे में ‘बपौती’ शब्द का इस्तेमाल किया, वह न केवल अपमानजनक है बल्कि सदन की गरिमा को भी ठेस पहुंचाता है।

​विधानसभा अध्यक्ष से हस्तक्षेप की मांग

​राजद विधायक ने इस पूरे मामले में विधानसभा अध्यक्ष की भूमिका पर जोर दिया है। उन्होंने मांग की है कि:

  • ​अध्यक्ष महोदय इस घटनाक्रम पर स्वतः संज्ञान लें।
  • ​संसदीय कार्यवाही के रिकॉर्ड से ऐसे आपत्तिजनक शब्दों को हटाया जाए।
  • ​विपक्ष के नेताओं के प्रति इस्तेमाल की जा रही भाषा पर कड़ा एतराज जताया जाए।

​लोकतांत्रिक मूल्यों का हवाला

​आलोक मेहता ने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री जैसे उच्च पद पर बैठे व्यक्ति से शालीनता की अपेक्षा की जाती है। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि अगर सदन के भीतर ही अपशब्दों का प्रयोग होगा, तो इससे प्रदेश की जनता के बीच गलत संदेश जाएगा। राजद अब इस मुद्दे पर पीछे हटने के मूड में नहीं है और सदन से लेकर सड़क तक मर्यादा की रक्षा की मांग कर रही है।