अंबाला। आजादी की पहली लड़ाई 1857 के शहीदों की गौरवगाथा को जीवंत करने के लिए अंबाला कैंट में निर्मित भव्य शहीद स्मारक में लाइट एंड साउंड शो का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम के दौरान सूचना, जनसंपर्क एवं भाषा विभाग के आयुक्त के. मकरंद पांडुरंग ने हरियाणा के ऊर्जा, परिवहन एवं श्रम मंत्री अनिल विज को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। इस अवसर पर मकरंद पांडुरंग ने शहीद स्मारक के निर्माण और इसे साकार करने में अनिल विज की महत्वपूर्ण भूमिका की सराहना की।

अंबाला कैंट में 1857 के शहीदों की स्मृति में बने इस ऐतिहासिक स्मारक के पीछे अनिल विज का वर्षों पुराना संकल्प और प्रयास रहा है। उनका मानना रहा है कि स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास केवल किताबों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि नई पीढ़ी को शहीदों के बलिदान से प्रत्यक्ष रूप से जोड़ना जरूरी है।

800 करोड़ की लागत से बना भव्य स्मारक

अंबाला कैंट का शहीद स्मारक अनिल विज का ड्रीम प्रोजेक्ट है। करीब 800 करोड़ रुपये की लागत से बने इस स्मारक में 23 गैलरियां बनाई गई हैं, जिनमें 1857 की क्रांति से जुड़े ऐतिहासिक प्रसंगों और वीरों की गाथाओं को प्रदर्शित किया गया है।

इस स्मारक में 700 से अधिक शहीदों के नाम स्वर्ण अक्षरों में अंकित किए गए हैं। करीब 68 मीटर ऊंचा कमल के आकार का टावर, आधुनिक प्रोजेक्शन तकनीक, संग्रहालय और 2500 दर्शकों की क्षमता वाला ओपन एयर थिएटर इसकी भव्यता को और बढ़ाते हैं।

इतिहास को जीवंत करने की आधुनिक पहल

कार्यक्रम के दौरान आधुनिक तकनीक से तैयार लाइट एंड साउंड शो के माध्यम से 1857 की क्रांति की घटनाओं, वीरों के संघर्ष और उनके बलिदान को प्रभावशाली तरीके से प्रदर्शित किया गया। इस स्मारक की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां आने वाले लोग आधुनिक तकनीक के जरिए इतिहास को महसूस कर सकेंगे। लाइट एंड साउंड शो के जरिए नई पीढ़ी को यह समझाने का प्रयास किया गया है कि आजादी की लड़ाई कितने संघर्षों और बलिदानों से होकर गुजरी थी।

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