SIR को लेकर मचे विवाद के बीच चुनाव आयोग ने गुरुवार को एक बड़ा ऐलान किया. SIR विवाद और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग की बीच चुनाव आयोग ने 17 राज्यों में विशेष सारांश पुनरीक्षण (SSR) करने का आदेश दिया है. चुनाव आयोग ने जन प्रतिनिधि कानून की धारा 21 के तहत यह आदेश दिया है. चुनाव आयोग ने इसके लिए राज्यों को सूचित किया है.

यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब विपक्षी नेताओं की ओर से ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (SIR) प्रक्रिया को लेकर कानूनी चुनौतियां दी जा रही हैं और व्यापक विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं.

SIR विवाद के बीच, चुनाव आयोग ने 17 राज्यों में मतदाता सूची के Special Summary Revision की घोषणा की है. चुनाव आयोग ने उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, मणिपुर और गोवा सहित इन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को एक पत्र लिखा है, जिसमें आयोग ने बताया कि एक जनवरी 2027 ‘‘पात्रता तिथि’’ मानी जाएगी.

इस रिवीजन के लिए 1 जनवरी 2027 को क्वालिफाइंग डेट माना गया है. इसका मतलब कि 1 जनवरी 2027 तक जो लोग भी 18 साल के पूरे हो रहे हैं, वे अपना नाम वोटर लिस्ट में जुड़वा सकते हैं.

इन 17 राज्यों में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, मणिपुर और गोवा भी शामिल हैं, जहां चुनाव होने वाले हैं. इस पुनरीक्षण प्रक्रिया में अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, असम, बिहार, छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, केरल, लक्षद्वीप, मध्य प्रदेश, मणिपुर, पुडुचेरी, पंजाब, राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल शामिल होंगे.

चुनाव आयोग ने कहा कि जिन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) चल रहा है या हाल ही में पूरा हुआ है, वहां Special Summary Revision का कार्यक्रम बाद में घोषित किया जाएगा.

हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भी में मतदाता सूचियों की समीक्षा का कार्यक्रम मौसम को ध्यान में रखकर बाद में घोषित किया जाएगा. इन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश में अभी एसआईआर शुरू नहीं कराई गई है.

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