Automobile desk: भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में पिछले कुछ सालों से एसयूवी (SUV) गाड़ियों का दबदबा साफ देखने को मिल रहा है। सड़क पर हर दूसरी गाड़ी बड़ी और ऊंची नजर आती है। हालांकि, गाड़ियों की इस भीड़ के बीच अब एक नया बदलाव आकार ले रहा है। कार बाजार की चमक-धमक और एसयूवी के इस दौर के बावजूद, भारतीय ग्राहक एक बार फिर से छोटी कारों और हैचबैक सेगमेंट की तरफ रुख करने लगे हैं। वहीं दूसरी ओर, भारतीय सड़कों पर कभी शान की सवारी मानी जाने वाली सेडान गाड़ियों की स्थिति को लेकर भी बाजार में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
सड़कों पर छोटी गाड़ियों की यह वापसी किसी इत्तेफाक का नतीजा नहीं है, बल्कि इसके पीछे ग्राहकों की बदलती जरूरतें और आर्थिक कारण शामिल हैं। आजकल के दौर में गाड़ियों के दाम काफी तेजी से बढ़े हैं। ऑटोमोबाइल सेक्टर में नई तकनीकों और सुरक्षा मानकों के सख्त होने के कारण एंट्री-लेवल कारों के दाम भी अब आम खरीदार के बजट की ऊपरी सीमा को छूने लगे हैं। ऐसे में जो लोग पहली बार गाड़ी खरीद रहे हैं या जिनका बजट सीमित है, उनके लिए बड़ी एसयूवी या सेडान गाड़ियां जेब पर काफी भारी पड़ रही हैं। यही वजह है कि कम शुरुआती कीमत वाली छोटी कारें बजट फ्रेंडली खरीदारों की पहली पसंद बन रही हैं।
गाड़ी खरीदने के बाद उसका रोजमर्रा का खर्च भी एक बहुत बड़ा मुद्दा होता है। ईंधन की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं और ऐसे माहौल में हर कोई माइलेज का गणित लगाने में लगा है। बड़ी गाड़ियों का वजन और उनका भारी-भरकम इंजन पेट्रोल-डीजल की ज्यादा खपत करता है। इसके विपरीत, छोटी और हल्की कारें कम ईंधन में ज्यादा दूरी तय करती हैं। रोजाना ऑफिस आने-जाने वाले या शहर के भीतर ज्यादा सफर करने वाले लोगों के लिए माइलेज का यह फर्क हर महीने हजारों रुपये की बचत करा देता है। इसके साथ ही, छोटी गाड़ियों का सर्विस और मेंटेनेंस का खर्च भी काफी कम होता है, जो मिडिल क्लास फैमिली को अपनी ओर खींचता है।
मेट्रो शहरों की बात करें तो वहां की सड़कों का हाल किसी से छिपा नहीं है। जगह-जगह लगता ट्रैफिक जाम और पार्किंग की भारी किल्लत ने लोगों की नाक में दम कर रखा है। संकरी गलियों में बड़ी गाड़ी को मोड़ना हो या मॉल और दफ्तर के बाहर संकरी जगह में कार पार्क करनी हो, हैचबैक कारें सबसे ज्यादा सहूलियत देती हैं। भारी ट्रैफिक में भी छोटी कारों को संभालना और चलाना काफी आसान होता है, जिससे ड्राइवर को ज्यादा मानसिक तनाव का सामना नहीं करना पड़ता।
जहां तक सेडान गाड़ियों का सवाल है, तो यह सच है कि एसयूवी और हैचबैक के बीच इस सेगमेंट की हिस्सेदारी पहले जैसी नहीं रही। लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि सेडान का दौर खत्म हो गया है। आज भी जो लोग बेहतरीन राइड कम्फर्ट, प्रीमियम लुक और लंबी दूरी के सफर में स्टेबिलिटी पसंद करते हैं, उनकी पहली पसंद सेडान ही है। कंपनियां अब सेडान गाड़ियों में नए जमाने के फीचर्स, स्पॉर्टी डिजाइन और बेहतर सेफ्टी ऑप्शन देकर इस सेगमेंट को नए सिरे से जीवित करने में जुटी हुई हैं।


