Anant Singh News: बिहार एमएलसी चुनाव को लेकर मोकामा से जदयू के बाहुबली विधायक अनंत सिंह के तेवर दिन पर दिन और भी सख्त होते नजर आ रहा हैं। हालाही में एक मीडिया चैनल से बातचीत के दौरान अनंत सिंह ने साफ शब्दों में कहा कि, वह नीरज सिंह को चुनाव हराकर रहेंगे। इसके लिए चाहे उन्हें पार्टी से भी क्यों ना बाहर होना पड़े।

ये पार्टी की लड़ाई नहीं- अनंत सिंह

अनंत सिंह ने यह भी कहा कि, ये पार्टी की लड़ाई नहीं है। किसी भी नेता को इसमें नहीं पड़ना चाहिए। अगर पार्टी के किसी नेता को इस लड़ाई में पड़ना था, तो उसे पहले ही पड़ना चाहिए था, जब नीरज सिंह ने पार्टी में रहते हुए भी 4 बार मेरा (अनंत सिंह) और 2 बार ललन सिंह का विरोध किया। मोकामा विधायक ने कहा कि दुलारचंद मर्डर केस और एके-47 केस में मुझे फंसाया गया।

‘नीतीश मनाते, तो हम मान जाते’

अनंत सिंह ने आगे कड़े शब्दों में कहा कि, अगर वह (नीरज सिंह) हमारे साथ गलत करेंगे और हम चुम्मा लें, ऐसा नहीं होगा। पार्टी रहे, चाहे जाए, अब वह पीछे नहीं हटने वाले हैं। इस दौरान उन्होंने यह भी कहा कि, नीतीश कुमार अगर हमको मनाते, तो हम मान जाते। लेकिन अभी तक नीतीश कुमार ने मुझे कुछ नहीं कहा है। ललन सिंह ने भी मुझे कुछ नहीं बोला है। अगर मुझे पार्टी की तरफ से कोई बुलाए तो मैं जाने को और अपनी बात रखने को तैयार हूं। नीतीश जी से मेरी मुलाकात हुई थी, लेकिन उन्होंने इस विषय पर कुछ नहीं कहा।

अनंत सिंह ने कहा कि, पार्टी यह तय करें कि नीरज का ज्यादा योगदान है या पार्टी के लिए मेरा योगदान है। मैंने पार्टी के लिए बहुत कुर्बानियां दी है। मैंने गोली खाई है। उन्होंने क्या किया?

अनुज सिंह के समर्थन में किया रोड शो

बता दें कि इससे पहले कल (शनिवार) देर रात अनंत सिंह ने नवादा में रोड शो किया। इस दौरान उन्होंने जदयू से एमएलसी उम्मीदवार नीरज कुमार का विरोध करते हुए जन सुराज उम्मीदवार अनुज सिंह के समर्थन में लोगों से वोट करने की अपील की। अनंत सिंह द्वारा पहले अनुज सिंह के नामांकन में जाना, फिर उनके लिए प्रचार करना जदयू के अंतर जारी खींचतान को लेकर चर्चाओं का बाजार फिर से गर्म हो गया है।

ललन सिंह ने हाथ खड़े किए

वहीं, दूसरी ओर पार्टी द्वारा अनंत सिंह और नीरज कुमार के विवाद को सुलझाने की मिली जिम्मेदारी से केंद्रीय मंत्री ललन सिहं भी अपने हाथ खड़ा करते हुए नजर आए। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि, हम किसी के बीच में नहीं पड़ते हैं। अगर दोनों मिलना चाहेंगे तो हम समझौता करा सकते हैं, लेकिन पंचायती नहीं करेंगे।

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