कुंदन कुमार, पटना। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के हालिया पटना दौरे को लेकर चल रही सियासी चर्चाओं पर विराम लगा दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह दौरा पूरी तरह से एक सामान्य और नियमित संगठनात्मक प्रक्रिया है। बिहार के साथ राष्ट्रीय अध्यक्ष का पुराना और गहरा भावनात्मक जुड़ाव रहा है, जिसके कारण उनका यहां आना-जाना और पार्टी कार्यकर्ताओं से मिलना एक स्वाभाविक बात है। इस दौरे को किसी विशेष राजनीतिक चश्मे से देखने की आवश्यकता नहीं है।
तेजस्वी यादव और राजद पर तीखा हमला
राजद नेता तेजस्वी यादव के बयानों पर पलटवार करते हुए भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने कहा कि केवल पार्टी और चेहरे बदलने से कुछ नहीं होता, बल्कि इसके लिए सबसे पहले अपनी नियत और कार्यशैली बदलने की सख्त जरूरत है। उन्होंने कहा कि आज की जागरूक जनता खोखले भाषणों से बहकने वाली नहीं है, बल्कि वह अपने विकास और अधिकारों का हिसाब मांगती है। राजद पर निशाना साधते हुए उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि जिन लोगों ने इतने लंबे वर्षों तक बिहार की सत्ता पर राज किया और जिनके राष्ट्रीय अध्यक्ष खुद भ्रष्टाचार के मामलों में सजायाफ्ता हैं, उन्हें नैतिकता की बात करने का कोई अधिकार नहीं है।
विपक्षी गठबंधन पर तंज
विपक्ष के चुनावी गठबंधन पर करारा प्रहार करते हुए सरावगी ने कहा कि यह तथाकथित महागठबंधन सिर्फ और सिर्फ स्वार्थ की राजनीति पर टिका हुआ है। यदि इस गठबंधन में कोई वैचारिक नीति, मजबूत सिद्धांत या साझा कार्यक्रम होता, तो हालिया विधानसभा और विधान परिषद के चुनावों में कांग्रेस, राजद और वाम दल (लेफ्ट) कभी भी अलग-अलग रास्तों पर चुनाव नहीं लड़ते। इसके विपरीत, उन्होंने एनडीए (NDA) की एकजुटता की मिसाल देते हुए कहा कि एनडीए के सभी पांचों घटक दल पूरी ताकत, तालमेल और एकजुटता के साथ मिलकर चुनाव लड़ रहे हैं और जनता का विश्वास जीत रहे हैं।
मल्लिकार्जुन खड़गे के बयान पर आपत्ति
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के एक हालिया बयान पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए संजय सरावगी ने इसे देशविरोधी और गैर-कानूनी करार दिया। उन्होंने मांग की कि कांग्रेस अध्यक्ष को अपने इस बयान के लिए देश की सवा सौ करोड़ जनता से सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि देश के प्रधानमंत्री को किसी एक दल या कांग्रेस के नेताओं ने नहीं, बल्कि सीधे तौर पर भारत की महान जनता ने भारी बहुमत से चुना है। देश के लोकतांत्रिक रूप से चुने गए प्रधानमंत्री और देश को कोसना सीधे तौर पर भारत के लोकतंत्र का अपमान करना है, जिसे देश की जनता कभी बर्दाश्त नहीं करेगी।

