चंडीगढ़। उत्तराखंड की बेटी अंकिता भंडारी के लिए न्याय की मांग कर रहे उसके माता-पिता की गिरफ्तारी का मामला अब राजनीतिक तूल पकड़ रहा है। दिल्ली के इंडिया गेट पर धरना दे रहे अंकिता के माता-पिता को सुबह चार बजे पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। इस कार्रवाई को लेकर हरियाणा कांग्रेस ने विरोध जताया है। कांग्रेस नेता कुमारी सैलजा ने भी भाजपा सरकार पर सवाल उठाते हुए न्याय की मांग करने वालों के साथ किए जा रहे व्यवहार पर आपत्ति जताई है।
बेटी के लिए न्याय मांगना भी अपराध है? कुमारी सैलजा ने इस सवाल के जरिए भाजपा सरकार को घेरा। उनका कहना है कि अंकिता के माता-पिता अपनी बेटी को न्याय दिलाने के लिए आवाज उठा रहे थे। उनकी मांग थी कि मामले की केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से जांच पूरी होने तक संबंधित वीआईपी को राज्यपाल के पद पर नियुक्त नहीं किया जाए।
सैलजा ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने परिवार की आपत्तियों को नजरअंदाज किया। इसके बावजूद संबंधित व्यक्ति को राज्यपाल नियुक्त कर दिया गया। अब जब परिवार अपनी मांग को लेकर दिल्ली में धरने पर बैठा, तो पुलिस की कार्रवाई का सामना करना पड़ा।
कांग्रेस नेता ने इस घटनाक्रम को लेकर भाजपा सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि आखिर सरकार किसे बचाना चाहती है और अंकिता के माता-पिता को अपनी बात रखने से क्यों रोका जा रहा है?
सैलजा ने कहा कि अंकिता भंडारी के माता-पिता के साथ हुआ व्यवहार केवल एक परिवार का मामला नहीं है। यह न्याय और बेटी के सम्मान से जुड़ा सवाल है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की जनता अपनी बेटी को न्याय दिलाने की मांग पर चुप नहीं बैठेगी।
हरियाणा कांग्रेस ने भी इस कार्रवाई का विरोध किया है। इस मुद्दे पर कांग्रेस ने भाजपा सरकार को घेरते हुए सवाल उठाया है कि जब एक परिवार अपनी बेटी के लिए न्याय की मांग कर रहा है, तो उसकी आवाज सुनने के बजाय उसके खिलाफ कार्रवाई क्यों की जा रही है?
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