कुमार इंदर, जबलपुर। बहुचर्चित अंकिता राठौर और हसनैन अंसारी लव जिहाद मामले में हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। अदालत ने इस मामले में केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। मैरिज एक्ट को लेकर केंद्र सरकार की ओर से बनाए गए कानून को परिभाषित करने के निर्देश दिए है।
अंकिता-हसनैन शादी को लेकर स्पेशल मैरिज एक्ट विवादों में घिरा है। अंकित राठौर के पिता ने स्पेशल मैरिज एक्ट को चुनौती दी है। पिछली सुनवाई में अंकिता राठौर और हसनैन अंसारी ने कोर्ट से सुरक्षा की गुहार लगाई थी। पिछली बार हाईकोर्ट ने शादी को लीगल मानने से इनकार किया था।
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कोर्ट ने हिन्दू लड़की, मुस्लिम लड़के की शादी को Irregular Marriage (फ़ासीद विवाह) माना था। कोर्ट ने कहा कि इस तरह की शादी इन रेगुलर श्रेणी में आती है। दिसंबर, 2024 में हाईकोर्ट ने स्पेशल हिंदू मैरिज एक्ट के तहत शादी की परमिशन दी थी। हिंदूवादी संगठनों ने भी इस विवाह का विरोध किया था।
याचिकाकर्ता के वकील अशोक लालवानी ने बताया कि विश्व हिंदू परिषद धर्म प्रसार के प्रमुख दिग्विजय सिंह और एक हिंदू बालिका अंकिता राठौर के पिता हीरालाल राठौर ने याचिका लगाई थी। पूर्व में अंकिता एक मुस्लिम लड़के से शादी करना चाहती थी। सुरक्षा की मांग को लेकर अंकिता ने याचिका लगाई थी। यह मामला डिवीजन बेंच में गया। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर की डिवीजन बेंच ने यह निर्णय दिया क्यों कि स्पेशल मैरिज एक्ट के सेशन 4 में नान ऑप्शन क्लॉज है। जिसकी वजह से शादी तो हो सकती है।
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वकील अशोक लालवानी ने आगे बताया कि अब समस्या ये है कि 1954 में हिंदुओं के जो पुराने कानून थे, उसमें महिलाओं को संपत्ति में अधिकार नहीं था। हिंदुओं को चार-चार शादी करने का अधिकार था, लेकिन संविधान के आर्टिकल 14 को बीच में बराबरी का दर्जा देते हुए समस्त महिलाओं-पुरुषों के लिए बराबरी का कानून बनाया गया था। क्रिश्चियन के कानून भी कोडिफाइ किये गए, लेकिन मुस्लिम कानून को कोडिफाइ नहीं किया गया था। मगर आर्टिकल 13 कहता है कि जो कस्टमरी लॉ है, वो भी कानून माने जाएंगे। मुस्लिम पर्सलन लॉ एक कस्टमरी लॉ है। मुस्लिम पर्सनल लॉ के मुताबिक, एक मूर्ति पूजक यानीहिंदू लड़की की शादी नहीं हो सकती, अगर वह करेगा तो Irregular Marriage (फ़ासीद विवाह) कहलाएगा।

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