न्यामुद्दीन अली, अनूपपुर। मध्य प्रदेश के अंतिम छोर पर बसे अनूपपुर जिले से सरकारी दावों और शिक्षा व्यवस्था की पोल खोलती एक गंभीर तस्वीर सामने आई है। जिले के बहेराबांध क्षेत्र स्थित ग्राम क्योटार के शासकीय प्राथमिक शाला में मासूम छात्र-छात्राएं जर्जर भवन और बुनियादी सुविधाओं के अभाव के बीच अपनी जान जोखिम में डालकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं।
बारिश में टपकती छत और क्लासरूम में भरता है पानी
ग्राम क्योटार स्थित शासकीय प्राथमिक शाला भवन की हालत इतनी खस्ता हो चुकी है कि छतों के प्लास्टर जगह-जगह से टूटकर गिर रहे हैं। बारिश होते ही छतों से पानी टपकने लगता है और पूरी कक्षा में पानी भर जाता है। ऐसे में मासूम बच्चों को मजबूरी में पानी के बीच बैठकर पढ़ाई करनी पड़ती है या फिर बारिश से बचने के लिए गांव के अन्य घरों का सहारा लेना पड़ता है। छत गिरने की आशंका के बीच अक्सर बच्चे भीग जाते हैं, जिससे वे बीमार भी पड़ रहे हैं।

न बिजली न रोशनी, कीड़े-मकोड़ों का मंडराता खतरा
विद्यालय में बिजली का कनेक्शन या उचित व्यवस्था न होने से मुसीबतें और बढ़ गई हैं। बादल छाने या बारिश के समय कक्षाओं में अंधेरा छा जाता है। रोशनी के लिए खिड़कियों को खुला रखना पड़ता है जिससे बरसाती कीड़े-मकोड़ों और जहरीले जीवों के अंदर घुसने का खतरा लगातार बना रहता है।

सरकारी दावों पर सवाल, ग्रामीणों ने की सुधार की मांग
एक ओर जहां सरकार आदिवासी अंचलों में गुणवत्तापूर्ण और सुरक्षित शिक्षा के बड़े-बड़े दावे करती है, वहीं क्योटार के इस प्राथमिक शाला की तस्वीर कुछ और ही बयां कर रही है। ग्रामीणों का कहना है कि स्कूल भवन की मरम्मत और बिजली की व्यवस्था को लेकर कई बार प्रशासनिक अधिकारियों को अवगत कराया गया लेकिन अब तक कोई सुनवाई नहीं हुई। अभिभावकों और ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द से जल्द स्कूल भवन की मरम्मत कराने और बिजली व्यवस्था दुरुस्त करने की गुहार लगाई है।

Follow the LALLURAM.COM MP channel on WhatsApp
https://whatsapp.com/channel/0029Va6fzuULSmbeNxuA9j0m


