कथित शराब घोटाला मामले में अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) और मनीष सिसोदिया (Manish Sisodia) को बड़ी राहत मिली है। अदालत ने दोनों नेताओं को मामले में आरोपमुक्त कर दिया है। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि जांच एजेंसी CBI (Central Bureau of Investigation) के पास दोनों के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं हैं। अदालत के अनुसार उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोप साबित नहीं होते, इसलिए आरोपमुक्त करने का फैसला लिया गया। इसी के साथ मामले में नामजद अन्य आरोपियों को भी राहत देते हुए आरोपमुक्त कर दिया गया है।
दोनों नेता मामले की सुनवाई के लिए राउज़ एवेन्यू कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हुए थे। सुनवाई के दौरान कुछ अन्य आरोपी, जिनमें K. Kavitha, Amandeep Dhall और कई अन्य शामिल थे, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत में पेश हुए। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि आबकारी नीति को लेकर किसी व्यापक साजिश या आपराधिक इरादे के पर्याप्त सबूत नहीं मिले। कोर्ट के अनुसार उपलब्ध साक्ष्यों से यह साबित नहीं होता कि नीति बनाने में आपराधिक मंशा थी। इसी के साथ अदालत ने CBI द्वारा दर्ज मामले को बंद करते हुए अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया समेत सभी 23 आरोपियों को आरोपों से मुक्त कर दिया।
कोर्ट ने कहा कि एजेंसी द्वारा लगाए गए आरोपों में कोई दम नजर नहीं आया और मामले में किसी आपराधिक षड्यंत्र के पर्याप्त सबूत नहीं मिले। अदालत ने स्पष्ट कहा कि प्रॉसिक्यूशन अपना केस साबित करने में विफल रहा है, इसलिए आरोप टिक नहीं सकते। इसी आधार अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया समेत कई अन्य आरोपियों को बरी कर दिया गया। सुनवाई के दौरान जज ने CBI की चार्जशीट और दस्तावेजों पर भी सवाल उठाए। अदालत ने कहा कि जांच एजेंसी द्वारा पेश किए गए दस्तावेज चार्जशीट से मेल नहीं खाते। जज ने नाराजगी जताते हुए कहा कि उन्हें अब तक कथित कन्फेशनल स्टेटमेंट (स्वीकारोक्ति बयान) की कॉपी तक उपलब्ध नहीं कराई गई। अदालत ने यह भी कहा कि वह एजेंसी के वकील से ईमानदारी की अपेक्षा करती है।
सुनवाई के दौरान अदालत ने CBI की चार्जशीट में इस्तेमाल किए गए कुछ शब्दों पर भी आपत्ति जताई। जज ने विशेष रूप से “साउथ ग्रुप” जैसे शब्द के प्रयोग को लेकर चिंता व्यक्त की। अदालत ने कहा कि ऐसे शब्दों का इस्तेमाल उचित नहीं है। जज ने टिप्पणी करते हुए पूछा कि यदि यही चार्जशीट Chennai में दाखिल की जाती, तो क्या वहां भी “साउथ ग्रुप” लिखा जाता? अदालत ने यह भी सवाल किया कि यह शब्द किसने गढ़ा। इस पर CBI की ओर से जवाब दिया गया कि यह कई आरोपियों के लिए इस्तेमाल किया गया एक साझा शब्द था।
जज ने उदाहरण देते हुए कहा कि अमेरिका में एक मामले को केवल इसलिए खारिज कर दिया गया था क्योंकि “डोमिनिक समूह” जैसे शब्द का प्रयोग किया गया था। अदालत ने स्पष्ट किया कि “साउथ ग्रुप” जैसे शब्दों का उपयोग नहीं किया जाना चाहिए था। CBI ने अपनी चार्जशीट में Arvind Kejriwal, Manish Sisodia, Durgesh Pathak, K. Kavitha समेत कुल 23 लोगों को आरोपी बनाया था। एजेंसी ने इस मामले में पहली चार्जशीट 2022 में दाखिल की थी, जिसके बाद सप्लीमेंट्री चार्जशीट भी पेश की गई।
कथित दिल्ली आबकारी (शराब) नीति मामले में जांच एजेंसी CBI ने आरोप लगाया था कि नीति को अपने पक्ष में करवाने के लिए शराब कारोबारियों से जुड़े एक कथित “साउथ लॉबी” द्वारा 100 करोड़ रुपये की घूस दी गई। हालांकि इस आरोप को लेकर अदालत में सुनवाई के दौरान सबूतों की पर्याप्तता पर सवाल उठे। CBI की ओर से दाखिल चार्जशीट में कुल 23 आरोपियों के नाम शामिल किए गए थे। इनमें प्रमुख रूप से Arvind Kejriwal, Manish Sisodia, K. Kavitha, Durgesh Pathak, Vijay Nair, Abhishek Boinpally, Arun Ramachandra Pillai, Sameer Mahendru, Amandeep Singh Dhall, Amit Arora और P. Sarath Chandra Reddy सहित कई कारोबारी और अन्य व्यक्ति शामिल थे। इसके अलावा चार्जशीट में कुलदीप सिंह, नरेंद्र सिंह, मुथा गौतम, अर्जुन पांडे, बुच्चीबाबू गोरंटला, राकेश जोशी, दामोदर प्रसाद शर्मा, प्रिंस कुमार, चनप्रीत सिंह, अरविंद कुमार सिंह, विनोद चौहान और आशीष माथुर के नाम भी आरोपी के तौर पर दर्ज किए गए थे।
दिल्ली की 2022–23 की आबकारी (एक्साइज) नीति से जुड़े बहुचर्चित मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। CBI ने इसी नीति के आधार पर केस दर्ज किया था, जिसके बाद Enforcement Directorate (ED) ने भी मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों में जांच शुरू की। इस मामले में Aam Aadmi Party (AAP) के कई नेता जेल भी गए, उनकी जमानत याचिकाएं कई बार खारिज हुईं और बाद में कुछ को राहत मिली। शुक्रवार को दिल्ली की राउज़ एवेन्यू कोर्ट ने कहा कि प्रथम दृष्टया CBI की चार्जशीट के आधार पर Arvind Kejriwal और Manish Sisodia के खिलाफ मामला नहीं बनता। अदालत ने चार्जशीट को कमजोर बताते हुए दोनों नेताओं को राहत दी।
अदालत ने अपने फैसले में महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि जब किसी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति या सार्वजनिक पदधारी पर गंभीर आरोप लगाए जाते हैं, तो उन्हें साबित करने के लिए ठोस और विश्वसनीय सामग्री होना आवश्यक है। केवल आरोपों के आधार पर आरोप तय नहीं किए जा सकते। अदालत की इस टिप्पणी के बाद Arvind Kejriwal, Manish Sisodia और Aam Aadmi Party (AAP) के लिए इसे बड़ी राहत माना जा रहा है। कोर्ट ने संकेत दिया कि जांच एजेंसी द्वारा पेश किए गए साक्ष्य आरोप तय करने के लिए पर्याप्त नहीं थे।
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