Rajasthan Nikay Chunav 2026 के बाद अब मेयर और सभापति चुनाव को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। इसी बीच पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता अशोक गहलोत ने राजस्थान की भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

गहलोत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर दावा किया कि मेयर और चेयरमैन के चुनाव में भाजपा बोर्ड बनाने के लिए प्रशासनिक अधिकारियों पर दबाव डाला जा रहा है। उन्होंने निर्दलीय और दूसरे दलों के पार्षदों को कथित तौर पर करोड़ों रुपये की रिश्वत देने और विरोध करने वालों को पुलिस के जरिए धमकाने का भी आरोप लगाया। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

गहलोत बोले- CMO से अधिकारियों पर बनाया जा रहा दबाव

अशोक गहलोत ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री कार्यालय से एक IAS अधिकारी कलेक्टरों और SDM को इस बात के लिए दबाव दे रहा है कि किसी भी तरह भाजपा का बोर्ड बनाया जाए। उन्होंने दावा किया कि मेयर और चेयरमैन बनाने के लिए निर्दलीय और दूसरे दलों के पार्षदों को करोड़ों रुपये की रिश्वत देने की कोशिश की जा रही है।

गहलोत के मुताबिक, जो पार्षद इसके लिए तैयार नहीं हो रहे, उन्हें पुलिस भेजकर जबरन उठवाने और धमकाने की कोशिश की जा रही है। यह गहलोत की ओर से लगाए गए आरोप हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है।

‘करोड़ों खर्च कर बनेगा चेयरमैन तो जनता से वसूली करेगा’

गहलोत ने अपने पोस्ट में मेयर और चेयरमैन चुनाव में कथित धनबल को लेकर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि अगर कोई व्यक्ति करोड़ों रुपये खर्च कर मेयर या चेयरमैन बनेगा तो उसके सामने अपनी लगाई रकम वापस निकालने का सवाल होगा।

उन्होंने दावा किया कि इसका असर शहरों में होने वाले विकास कार्यों पर पड़ेगा। गहलोत ने सड़कों, पट्टों, नालियों और दूसरे छोटे-बड़े कामों की फाइलों के जरिए कथित वसूली की आशंका जताई।

गहलोत ने इसे केवल राजनीतिक मामला नहीं बताते हुए जनता से सतर्क रहने की अपील की। उनका कहना है कि इसका सीधा असर आने वाले पांच वर्षों में आम लोगों पर पड़ सकता है।

UPI के मुद्दे पर भी केंद्र सरकार पर निशाना

अशोक गहलोत ने अपने पोस्ट में UPI पर लागू होने वाले नए MDR को लेकर भी केंद्र सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि यह फैसला अमेरिकी दबाव में लिया गया है और इसका फायदा Visa-Mastercard जैसी अमेरिकी कंपनियों को मिलेगा।

गहलोत ने इसके लिए जून 2025, मार्च 2026 और सितंबर 2026 की घटनाओं को जोड़ते हुए अपनी ओर से एक ‘क्रॉनोलॉजी’ पेश की। उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी संस्था USTR की रिपोर्ट के बाद भारत सरकार ने UPI शुल्क को लेकर अपना रुख बदला।

हालांकि, केंद्र सरकार का कहना है कि नया MDR ढांचा घरेलू नीति के तहत बनाया गया है। वित्त मंत्रालय के अनुसार, 2,000 रुपये तक के merchant UPI transactions और person-to-person transactions पर शुल्क नहीं लगेगा। सरकार के मुताबिक करीब 96 प्रतिशत P2M transactions भी प्रभावित नहीं होंगे।

15 अक्टूबर से लागू होगा नया MDR ढांचा

नए नियम के तहत 2,000 रुपये से अधिक के कुछ person-to-merchant UPI transactions पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू होगा। यह शुल्क merchant ecosystem पर है, सीधे ग्राहक पर नहीं। 75,000 रुपये या उससे अधिक के transaction पर MDR की अधिकतम सीमा 300 रुपये रखी गई है।

वित्त मंत्रालय ने बैंकों को यह सुनिश्चित करने को कहा है कि MDR का बोझ ग्राहकों पर न डाला जाए। Person-to-person UPI transactions पर राशि की कोई सीमा रखकर शुल्क नहीं लगाया गया है।

इस तरह राजस्थान के निकाय चुनाव में मेयर और सभापति की कुर्सी को लेकर चल रही राजनीतिक खींचतान के बीच अशोक गहलोत के आरोपों ने विवाद को और बड़ा कर दिया है। दूसरी ओर UPI शुल्क का मुद्दा भी उनके बयान का हिस्सा बना है, जिस पर केंद्र सरकार की ओर से अलग स्थिति स्पष्ट की जा चुकी है।

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