सोनीपत: जिस उम्र में एक किशोरी को पढ़ना-लिखना और अपने सपनों के साथ जिंदगी आगे बढ़ानी थी, आरोप है कि उसे असम से खरीदकर सोनीपत लाया गया। यहां उसे बेचने के लिए खरीदार तलाशे जा रहे थे, लेकिन सौदा नहीं हो सका। इसी बीच बीमारी से किशोरी की मौत हो गई। इसके बाद उसके शव को रात के अंधेरे में जमीन में दफना दिया गया।

करीब 23 दिन बाद कुत्तों के मिट्टी खोदने से शव बाहर आया, तो पूरे मामले का खौफनाक सच सामने आने लगा। पुलिस ने मामले में एक महिला को गिरफ्तार किया है। पूछताछ में महिला ने जो कहानी बताई, उसने मानव तस्करी के बेहद गंभीर पहलू को सामने ला दिया।

असम से खरीदकर लाए थे किशोरी

पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार महिला ने पूछताछ में बताया कि उसका पति ओमप्रकाश लड़कियों की खरीद-फरोख्त और मानव तस्करी करता था। आरोप है कि वही इस किशोरी को असम से खरीदकर सोनीपत लेकर आया था।

किशोरी को आसपास के इलाके में बेचने की कोशिश की जा रही थी। खरीदार नहीं मिला और इस बीच किशोरी बीमार पड़ गई। बीमारी के चलते उसकी मौत हो गई।

मौत के बाद इंसानियत भी दफना दी

किशोरी की मौत के बाद उसके शव को अस्पताल या पुलिस तक पहुंचाने के बजाय कथित तौर पर दंपति ने उसे ठिकाने लगाने का फैसला किया। आरोपी महिला के अनुसार, उसने और उसके पति ने रात के समय मलिकपुर गांव के पास एक गहरे गड्ढे में किशोरी का शव दफना दिया।

उन्हें शायद उम्मीद थी कि मिट्टी के नीचे दबा यह राज हमेशा के लिए दफन हो जाएगा। लेकिन करीब 23 दिन बाद कुत्तों ने मिट्टी खोद दी और किशोरी का शव बाहर आ गया। इसके बाद पुलिस को सूचना मिली और पूरे मामले की जांच शुरू हुई।

पति फरार, पहले भी जा चुका है जेल

पुलिस ने आरोपी महिला को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि उसका पति ओमप्रकाश फरार है। पुलिस उसकी तलाश में लगातार छापेमारी कर रही है। पुलिस के अनुसार, ओमप्रकाश पहले भी मानव तस्करी से जुड़े मामले में जेल जा चुका है।

अब जांच इस बात पर केंद्रित है कि किशोरी को असम से किस नेटवर्क के जरिए लाया गया था, उसे किसे बेचा जाना था और इस पूरे मानव तस्करी के खेल में और कितने लोग शामिल हैं।

एक किशोरी की मौत के साथ दफन हुआ यह राज 23 दिन बाद तो सामने आ गया, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर वह किन हालात में अपने घर से इतनी दूर पहुंची और उसके जैसे कितने और बच्चे इस कथित तस्करी के जाल में फंसे हैं?