संजय विश्वकर्मा, उमरिया। विश्वप्रसिद्ध बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व की प्रसिद्ध बाघिन डॉटी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत की खबर सामने आने के बाद वन्यजीव प्रेमियों के बीच गहरी मायूसी छा गई है। इन दिनों मानपुर बफर में बाघ के हमले और अन्य घटनाओं की पुनरावृत्ति लगातार बढ़ रही है। जानकारों का मानना है कि मानपुर बफर के रेंज ऑफिसर के पास पर्यटन प्रभारी का अतिरिक्त प्रभार होने और क्षेत्र में मॉनिटरिंग व पेट्रोलिंग की कमी के कारण ऐसी घटनाएं बढ़ रही हैं।

हाथी गश्ती के दौरान मिला शव, NTCA के मानकों का पालन

बाँधवगढ़ प्रबंधन के अनुसार, मानपुर बफर रेंज के बीट मझखेता में हाथी से गश्ती के दौरान दोपहर बाद एक मादा बाघ का शव बरामद हुआ। NTCA के मानकों का पालन करते हुए डॉग स्क्वाड के जरिए मृत बाघ और आसपास के क्षेत्र की सघन जांच की गई, जिसमें मौके पर कुछ भी संदिग्ध नहीं पाया गया। इसके बाद सक्षम वन्यजीव स्वास्थ्य अधिकारी और विकास खंड पशु चिकित्सा अधिकारी के दल ने वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में वीडियोग्राफी व फोटोग्राफी के बीच शव परीक्षण की कार्रवाई की। अग्रिम जांच के लिए आवश्यक नमूने संकलित कर विभिन्न प्रयोगशालाओं में भेज दिए गए हैं। प्रथम दृष्टया प्रबंधन बाघिन की मौत का कारण संदिग्ध मान रहा है।

रोचक रही है बाघिन डॉटी की लाइफ हिस्ट्री

जिस बाघिन को आज बांधवगढ़ ने खोया है, वह उस बाघ की माँ थी जिसने खितौली कोर जोन में अपनी बादशाहत कायम कर रखी थी। वर्ष 2011-12 में मगधी जोन में प्रसिद्ध पटिहा मादा एवं ब्लू आई नर की संतान के रूप में बाघिन डॉटी और बाघिन स्पॉटी का जन्म हुआ था। हिंदी फिल्म सीता और गीता की तरह यह दोनों बाघिनें दुनिया भर में प्रसिद्ध हुईं। डॉटी ने मगधी और स्पॉटी ने ताला कोर ज़ोन में अपनी टेरिटरी बनाई थी। डॉटी की पहली संतान के रूप में तीन बाघ शावकों का जन्म हुआ, जिनमें D1 आज बाँधवगढ़ के एक डोमिनेट बाघ के रूप में जाना जाता है।

वर्ष 2022 के आसपास जब डॉटी दूसरी बार मां बनी तो चार फीमेल शावकों ने जन्म लिया, जिन्होंने माँ डॉटी से मगधी कोर ज़ोन की टेरिटरी छीन ली। उसी दौरान ताला कोर जोन में बाघिन स्पॉटी की मौत हो गई थी, जिसका असल कारण जानकारों द्वारा स्टार्वेशन बताया गया था। इसके बाद डॉटी ने अपनी बहन की टेरिटरी पर कब्ज़ा कर लिया था और मानपुर बफर तक अपना क्षेत्र बना रखा था। डॉटी की उम्र लगभग 14 वर्ष हो चुकी थी।

एक दिन पहले चरवाहे पर हुआ था हमला

विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, घटना से ठीक एक दिन पहले 8 अक्टूबर की दोपहर हरदीहा नाला के पास तिलहाई पटपर रामपुर मझखेता के रहने वाले चरण सिंह पर बाघिन ने हमला कर दिया था। मौके पर मौजूद अन्य चरवाहों ने लाठी-डंडों से वार कर बाघिन को भगाया था। घायल चरण सिंह का आरोप है कि फॉरेस्ट के कर्मचारी उन्हें मानपुर स्वास्थ्य केंद्र में छोड़कर चले गए, लेकिन उन्हें इलाज के लिए एक रुपये की सहायता राशि तक नहीं मिली और दवाइयों का खर्च खुद उठाना पड़ रहा है।

इस घटना के ठीक दूसरे दिन 9 अक्टूबर को बाघिन की संदिग्ध मौत होना मानपुर बफर की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है, क्या बाघिन को डंडे से लगी आंतरिक चोट के कारण जानानी पड़ी? या फिर 14 साल की उम्र और जीवन के अंतिम दौर में शिकार न कर पाने के कारण उसकी मौत स्टार्वेशन से हुई?

फिलहाल प्रबंधन ने विसरा और अन्य नमूने जांच के लिए भेज दिए हैं, और विस्तृत रिपोर्ट्स आने के बाद ही बाघिन की मौत के असल कारणों का आधिकारिक खुलासा हो पाएगा।

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