भारत-बांग्लादेश के रिश्ते एक बार फिर वर्तमान समय में नाजुक दौर से गुजर रहा है. वहीं बांग्लादेश अपनी सैन्य क्षमता बढ़ाने की दिशा में एक और कदम आगे बढ़ाते हुए तुर्किए के साथ मिलकर बोगुरा में ड्रोन बनाने की फैक्ट्री लगाने की योजना की तैयारी कर रहा है. तुर्की भारत के आम प्रभाव वाले दायरे से बाहर है और भारत-तुर्की के रिश्ते पहले से ही तनावपूर्ण हैं. बोगुरा सिलिगुड़ी कॉरिडोर से करीब 100 से 200 किलोमीटर के दायरे में है.
बांग्लादेश तुर्की और चीन के साथ मिलकर ड्रोन बनाने की क्षमता विकसित कर रहा है. भारत के सिलीगुड़ी कॉरिडोर के करीब इसकी निर्माण इकाइयां लगाई जा सकती हैं.
दूसरे शब्दों में कहा जाए तो पाकिस्तान के बाद अब तुर्किये बांग्लादेश में भी अपनी रक्षा तकनीक का दायरा बढ़ा रहा है. दोनों देश मिलकर ड्रोन बनाने की तैयारी कर रहे हैं. बांग्लादेश के राज्य मंत्री मीर शाहे आलम के मुताबिक, तुर्की के साथ संयुक्त उद्यम के तहत ड्रोन बनाने की फैक्ट्री लगाई जाएगी.
इसे लेकर सबसे बड़ी बात यह है कि बांग्लादेश का बोगुरा प्रोजेक्ट भारत की चिंता बढ़ा सकता है, क्योंकि यह सिलीगुड़ी कॉरिडोर के बेहद पास है.
शुरुआत में तुर्की की मदद से बांग्लादेश में ड्रोन के अलग-अलग हिस्से बनाए जाने की योजना है. इसके बाद तकनीक और प्रशिक्षण के जरिए बड़े सैन्य ड्रोन बनाने की क्षमता विकसित करने की बात कही गई है.
हालांकि, नई दिल्ली और ढाका हाई-लेवल बातचीत को फिर से शुरू करने की कोशिश कर रहे हैं. अधिकारियों के बीच बातचीत चल रही है ताकि नवंबर के तीसरे हफ्ते में बांग्लादेश की प्रधानमंत्री तारिक रहमान की नई दिल्ली यात्रा का कार्यक्रम तय किया जा सके.
लेकिन इस कूटनीतिक नरमी के बीच एक और मुद्दा तनाव बढ़ा रहा है. वो है बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना का नई दिल्ली से बार-बार दिए जा रहे बयान जो ढाका के सत्ता प्रतिष्ठान को परेशान कर रहे हैं.
इस प्रोजेक्ट के लिए करीब 25,000 करोड़ रुपये के निवेश और भविष्य में इंडोनेशिया और मलेशिया जैसे देशों को निर्यात की योजना का दावा किया गया है. तुर्किये बांग्लादेश को ड्रोन बनाने की तकनीक भी देगा. बोगुरा भारत की सीमा से करीब 75 किलोमीटर दूर है.
बांग्लादेश अब रणनीतिक रूप से भारत के प्रतिद्वंद्वियों चीन और तुर्की की मदद से अपनी सैन्य क्षमता बढ़ा रहा है. बांग्लादेश पहले से तुर्किए के बायरक्तार TB2 ड्रोन का इस्तेमाल कर रहा है. बांग्लादेश के पास 12 TB2 ड्रोन हैं. इनमें से कुछ 2023 से ऑपरेशनल बताए गए हैं. बांग्लादेश का बोगुरा प्रोजेक्ट भारत की चिंता की वजह बन सकता है.
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