आशुतोष तिवारी, जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के जगदलपुर में दीपा सागर की मौत मामले ने तूल पकड़ लिया है। 1 नवंबर को बाफना लाइफस्टाइल कपड़ा दुकान की छत पर मिला उसका शव आज भी कई सवालों को जन्म दे रहा है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत की वजह हैंगिंग यानी फांसी बताई गई है। वहीं जेब से मिला सुसाइड नोट भी जांच का हिस्सा है, लेकिन अब इस मामले में मोबाइल फोन से जुड़ी जानकारी ने एक नया सवाल खड़ा कर दिया है। दूसरी ओर, बस्तर चेंबर ऑफ कॉमर्स ने भी पूरे मामले को लेकर अपना पक्ष रखते हुए निष्पक्ष जांच और बाफना परिवार की सुरक्षा की मांग की है।

आखिर उस शाम से अगली सुबह तक क्या हुआ था ?

परिजनों के मुताबिक, दीपा एक नवंबर को रोजाना की तरह बाफना लाइफस्टाइल दुकान में काम करने गई थी। शाम करीब 6 से 6:30 बजे के बीच वह दुकान से कहीं चली गई। इसके बाद परिवार का उससे संपर्क नहीं हो पाया। परिजनों के अनुसार, शाम 5 बजकर 38 मिनट पर दीपा के भाई ने उसके मोबाइल पर फोन किया था। दोनों के बीच करीब 2 मिनट 38 सेकंड तक बातचीत हुई, लेकिन रात 8 बजकर 47 मिनट पर जब भाई ने दोबारा उसी नंबर पर कॉल किया, तो दूसरी तरफ दीपा नहीं, बल्कि बाफना हाउस का एक कर्मचारी था। कर्मचारी ने बताया कि दीपा कहीं चली गई है। इसके अगले दिन यानी 2 नवंबर को दुकान की छत पर दीपा का शव बरामद हुआ।

लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई…

परिजनों का आरोप है कि दीपा के मोबाइल में 29 अक्टूबर के बाद की व्हाट्सऐप चैट मौजूद नहीं है। वहीं एक नवंबर की कुछ महत्वपूर्ण कॉल डिटेल भी नहीं मिल रही हैं। परिवार अब यह जानना चाहता है कि मोबाइल में यह जानकारी क्यों नहीं है? क्या यह तकनीकी वजह से हुआ या फिर मोबाइल से किसी तरह की छेड़छाड़ हुई है? फिलहाल ये परिजनों की आशंकाएं और आरोप हैं, जिनकी पुष्टि होना बाकी है। पुलिस ने मोबाइल फोन जब्त कर लिया है और उसकी फॉरेंसिक जांच के साथ कॉल डिटेल रिकॉर्ड का विश्लेषण कराया जा रहा है।

जांच में सामने आए दो महत्वपूर्ण तथ्य

इधर, पुलिस जांच में सामने आए दो महत्वपूर्ण तथ्य भी इस मामले को समझने के लिहाज से अहम हैं। पहला, मेडिकल कॉलेज डिमरापाल में हुए पोस्टमार्टम की रिपोर्ट, जिसमें डॉक्टरों ने मौत का कारण हैंगिंग यानी फांसी बताया है। रिपोर्ट में शरीर में किसी तरह की आंतरिक चोट नहीं मिलने और गले पर लिगेचर मार्क का उल्लेख किया गया है।

मौके से सुसाइ़ड नोट बरामद

दूसरा पोस्टमार्टम के दौरान दीपा की जेब से मिला सुसाइड नोट। पुलिस के मुताबिक, इस नोट में लिखा है “मैं अपने होशो-हवास में अपनी जान ले रही हूं, इसके लिए मेरे घर वालों और दोस्तों को परेशान ना करें।” पुलिस ने नोट जब्त कर लिया है और अब उसकी लिखावट तथा उसमें दर्ज बातों का विधिवत परीक्षण और सत्यापन कराया जा रहा है। ऐसे में नोट की प्रामाणिकता और उससे जुड़े तथ्यों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

सीसीटीवी में सामने नहीं आया संदिग्ध घटनाक्रम

वहीं घटनास्थल पर पुलिस और एफएसएल की टीम ने परिजनों की मौजूदगी में बारीकी से निरीक्षण किया। पूरे घटनास्थल की फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी कराई गई। दुकान में लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगालने पर पुलिस के अनुसार दीपा अकेले छत की ओर जाती दिखाई दे रही है। फिलहाल फुटेज में कोई संदिग्ध घटनाक्रम सामने नहीं आने की बात पुलिस ने कही है।

पांच सदस्यीय विशेष जांच टीम गठित

मामले की गंभीरता को देखते हुए CSP अंशिका जैन IPS के नेतृत्व में पांच सदस्यीय विशेष जांच टीम गठित की गई है। टीम में कोतवाली थाना प्रभारी लीलाधर राठौर, साइबर प्रभारी सागर पाठक, एसआई रानी सोनी, एएसआई सतीश यादव और महिला प्रधान आरक्षक उमा भगत शामिल हैं। पुलिस दुकान और बिल्डिंग में काम करने वाले कर्मचारियों सहित अन्य संबंधित लोगों के बयान दर्ज कर रही है।

सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग

बाफना परिवार से प्राप्त पत्र के बाद चेंबर ने आईजी, कलेक्टर और एसपी को ज्ञापन सौंपकर पूरे मामले में निष्पक्ष जांच और बाफना परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।

दोनों पक्षों की बात सुनकर निष्पक्ष जांच की मांग

चेंबर अध्यक्ष श्याम सोमानी का कहना है कि घटना के बाद बाफना परिवार ने संवेदना व्यक्त करते हुए तीन दिनों तक दुकान बंद रखी थी। उनका दावा है कि अब तक की पुलिस जांच में बाफना परिवार या दुकान के कर्मचारियों की कोई भूमिका सामने नहीं आई है। उन्होंने सुसाइड नोट और सीसीटीवी फुटेज का हवाला देते हुए कहा कि किसी को केवल आरोपों के आधार पर दोषी नहीं ठहराया जाना चाहिए। हत्या की बात कहने मात्र से हत्या साबित नहीं होती, इसके लिए ठोस साक्ष्य जरूरी हैं। चेंबर की मांग है कि पुलिस दोनों पक्षों की बात सुनकर निष्पक्ष जांच करे और यदि किसी के साथ अन्याय हुआ है तो उसे सामने लाया जाए।

चेंबर ने आरोप-प्रत्यारोप को लेकर जताई चिंता

चेंबर ने सिर्फ सुरक्षा और निष्पक्ष जांच की मांग ही नहीं की, बल्कि सोशल मीडिया पर चल रहे आरोप-प्रत्यारोप को लेकर भी चिंता जताई है। संगठन ने ज्ञापन में सोशल मीडिया पर कथित भ्रामक नैरेटिव फैलाने, बाफना परिवार की छवि धूमिल करने और मामले को अनावश्यक राजनीतिक रंग देने के आरोपों की जांच एसआईटी के दायरे में शामिल करने की मांग की है। साथ ही जांच पूरी होने से पहले किसी को दोषी ठहराने और किसी परिवार की सामाजिक या व्यावसायिक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने से बचने की अपील की है। चेंबर ने दुष्प्रचार और कानून के कथित दुरुपयोग में दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी रखी है।

चेंबर ने प्रशासन से की समाधान निकालने की अपील

चेंबर अध्यक्ष श्याम सोमानी ने यह भी कहा कि घटना के बाद दुकान तीन दिनों तक बंद रही और त्योहार के समय व्यापार प्रभावित हुआ। उनके मुताबिक, इस घटनाक्रम से दूसरे व्यापारी भी चिंतित हैं और अब युवाओं को रोजगार देने को लेकर उनके मन में आशंकाएं पैदा हो रही हैं। चेंबर ने प्रशासन से इस दिशा में भी समाधान निकालने की अपील की है। ज्ञापन सौंपने के दौरान अध्यक्ष श्याम सोमानी, वरिष्ठ उपाध्यक्ष विमल बोथरा, महामंत्री नवरत्न जालान सहित अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे। फिलहाल दीपा सागर की मौत का मामला कई महत्वपूर्ण सवालों के जवाब तलाश रहा है।

खड़े हुए कई सवाल

परिजन मोबाइल से जुड़ी कथित गड़बड़ियों और आखिरी घंटों के घटनाक्रम की स्पष्टता चाहते हैं। चेंबर निष्पक्ष जांच के साथ बाफना परिवार की सुरक्षा और प्रतिष्ठा की रक्षा की मांग कर रहा है। वहीं पुलिस सुसाइड नोट, मोबाइल की फॉरेंसिक जांच, कॉल डिटेल, सीसीटीवी फुटेज और संबंधित लोगों के बयानों के आधार पर हर पहलू को खंगाल रही है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि एक नवंबर की शाम से रात के बीच आखिर क्या हुआ था? मोबाइल से चैट और कॉल डिटेल गायब होने के परिजनों के आरोपों की सच्चाई क्या है? सुसाइड नोट के परीक्षण से क्या सामने आएगा? और जांच में किन-किन तथ्यों की पुष्टि होती है? इन सवालों के जवाब पुलिस की विस्तृत जांच के बाद ही सामने आएंगे।

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