आशुतोष तिवारी, जगदलपुर। विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा की करीब 700 साल पुरानी परंपरा मुरिया दरबार के नाम को लेकर विवाद खड़ा हो गया। दरअसल बस्तर दशहरा के कार्यक्रमों की जानकारी देने वाले प्रशासनिक पाम्पलेट में मुरिया दरबार की जगह ‘आम दरबार’ छाप दिया गया, जिसके बाद सोशल मीडिया में यह बातें तैरने लगी और जम कर इस बदलाव को लेकर सवाल उठने लगे। मामला गरमाने के बाद जिला प्रशासन ने आज सोमवार को नया पाम्पलेट जारी किया है, जिसमें ‘आम दरबार’ की जगह फिर से ‘मुरिया दरबार’ नाम दर्ज किया गया है।

बस्तर की ऐतिहासिक परंपरा है मुरिया दरबार
मुरिया दरबार बस्तर की ऐतिहासिक और पारंपरिक व्यवस्था का अहम हिस्सा है। राजशाही के दौर में राजा इस दरबार में बैठते थे, जहां गांवों के मांझी-चालकी अपने क्षेत्र की समस्याएं रखते थे और राजा उनका समाधान करते थे। राजशाही समाप्त होने के बाद भी यह परंपरा जारी है। अब मुख्यमंत्री इस दरबार में पहुंचकर लोगों की समस्याएं सुनते हैं।
पिछले साल अमित शाह हुए थे शामिल, इस बार राष्ट्रपति का कार्यक्रम
पिछले वर्ष केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह भी मुरिया दरबार में शामिल हुए थे, जबकि इस बार राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के दरबार में शामिल होने का कार्यक्रम है जहां वे मांझी-चालकी और अन्य पारंपरिक प्रतिनिधियों से उनके गांवों की समस्याएं सुनेंगी।
ऐसे में सवाल सिर्फ पाम्पलेट में नाम बदलने का नहीं, बल्कि बस्तर की सदियों पुरानी परंपरा और सांस्कृतिक पहचान का भी है। विवाद के बाद प्रशासन द्वारा नाम में सुधार कर नया पाम्पलेट जारी करना इस पूरे मामले का अहम घटनाक्रम है।
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