आशुतोष तिवारी, जगदलपुर। विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा की अनूठी परंपराओं में शामिल जोगी बिठाई की रस्म आज जगदलपुर के सिरहासार भवन में विधि-विधान के साथ संपन्न हुई। करीब 600 वर्षों से चली आ रही इस परंपरा में इस साल आमाबाल निवासी दौलत कुमार नाग जोगी के रूप में अगले 9 दिनों तक निर्जल तपस्या करेंगे। मान्यता है कि जोगी की यह साधना बस्तर दशहरा को निर्विघ्न और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए की जाती है, लेकिन इस बार जोगी बिठाई की रस्म के साथ हल्बा समाज की जाति संबंधी मांग का मुद्दा भी सामने आया है। समाज का कहना है कि लंबे समय से आश्वासन मिलने के बावजूद उनकी मांग पूरी नहीं हुई है। उनकी मांग है कि हल्बा समाज को अनुसूचित जनजाति में शामिल किया जाए, ताकि सरकारी योजनाओं का लाभ मिल सके। जोगी के रूप में तपस्या कर रहे दौलत कुमार नाग ने भी मांग पूरी नहीं होने पर अगले साल इस परंपरा में शामिल नहीं होने की बात कही है।
दरअसल जोगी बिठाई की परंपरा एक पुरानी मान्यता से जुड़ी है। कहा जाता है कि वर्षों पहले दशहरा पर्व के दौरान हल्बा समाज का एक युवक महल के पास नौ दिनों तक निर्जल उपवास रखकर तपस्या करने बैठ गया था। जब तत्कालीन महाराज को इसकी जानकारी मिली तो उन्होंने युवक से तपस्या का कारण पूछा। युवक ने बताया कि वह बस्तर दशहरा को शांतिपूर्ण और बिना किसी बाधा के संपन्न कराने के लिए साधना कर रहा है। इसके बाद महाराज ने सिरहासार भवन का निर्माण करवाया और इस परंपरा को आगे बढ़ाने में सहयोग दिया। तभी से हर साल जोगी बिठाई की रस्म निभाई जा रही है। इस साल दौलत कुमार नाग तीसरी बार जोगी के रूप में तपस्या करने बैठे हैं। उन्होंने मां दंतेश्वरी सहित देवी-देवताओं का आशीर्वाद लेकर अपनी साधना शुरू की। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु और स्थानीय जनप्रतिनिधि सिरहासार भवन पहुंचे।


शासन तक पहुंचाया जाएगा मामला : डिप्टी कलेक्टर
डिप्टी कलेक्टर सीपी बघेल ने जोगी बिठाई को बस्तर दशहरा की बड़ी रस्म बताते हुए कहा कि हर साल की तरह इस बार भी जोगी नौ दिनों तक निर्जल रहकर दशहरा पर्व के सफल आयोजन के लिए तपस्या करेंगे। उन्होंने कहा कि रस्म को लेकर लोगों में काफी उत्साह है और बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। वहीं जगदलपुर तहसीलदार राहुल गुप्ता ने बताया कि जोगी बिठाई की रस्म पूरी हो चुकी है और अगले नौ दिनों तक जोगी की साधना जारी रहेगी। उन्होंने हल्बा समाज की जाति संबंधी मांग को लेकर कहा कि समाज की ओर से अपनी समस्या रखी गई है। इस संबंध में दस्तावेज भी दिखाए गए हैं और मामले को आगे शासन स्तर पर बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।
अब तक समस्या का नहीं हुआ समाधान : नाग
इधर जोगी बने दौलत कुमार नाग ने बताया कि वह तीसरी बार इस परंपरा में शामिल हुए हैं और नौ दिनों तक बस्तर दशहरा के निर्विघ्न आयोजन की कामना के साथ तपस्या करेंगे, लेकिन उन्होंने हल्बा समाज की जाति संबंधी मांग पूरी नहीं होने पर नाराजगी भी जताई। दौलत नाग का कहना है कि समाज को लंबे समय से आश्वासन मिल रहा है, लेकिन अब तक समस्या का समाधान नहीं हुआ है। हमारी मांग है कि हल्बा समाज को अनुसूचित जनजाति में शामिल किया जाए, ताकि सरकारी योजनाओं का लाभ मिल सके। उन्होंने कहा कि यदि मांग पूरी नहीं होती है तो अगले साल वे जोगी बिठाई की रस्म में शामिल नहीं होंगे।
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