​Automobile desk. अक्सर लोग नई गाड़ी खरीदने या पुरानी कार बदलने का मन तो बना लेते हैं, लेकिन जब उसे बाजार में बेचने की बारी आती है, तो सही कीमत न मिलने से निराश होना पड़ता है। ज्यादातर कार मालिकों का मानना होता है कि इस्तेमाल हो चुकी गाड़ी की वैल्यू तेजी से गिरती है, जो एक हद तक सच भी है। हालांकि, अगर आप अपनी कार की थोड़ी देखभाल और सही तरीके से तैयारी करें, तो सेकंड हैंड मार्केट में उसकी रीसेल वैल्यू आसानी से 20 से 30 फीसदी तक बढ़ा सकते हैं। आइए जानते हैं वे कौन सी बातें हैं जो आपकी कार को डीलर या खरीदार की पहली पसंद बना सकती हैं।

​1. ऑथराइज्ड सर्विस रिकॉर्ड हमेशा रखें संभालकर
​किसी भी इस्तेमाल की हुई कार को खरीदते समय ग्राहक सबसे पहले उसकी सेहत जांचता है। अगर आपकी गाड़ी का टाइम-टू-टाइम मेंटेनेंस हुआ है और आपके पास ऑथराइज्ड सर्विस सेंटर की पूरी हिस्ट्री, सर्विस बुकलेट या बिल सुरक्षित हैं, तो खरीदार का भरोसा तुरंत बन जाता है। समय पर इंजन ऑयल चेंज, फिल्टर रिप्लेसमेंट और जेनुइन पार्ट्स का इस्तेमाल यह साबित करता है कि गाड़ी का इंजन बेहतरीन स्थिति में है, जिससे आपको मुंहमांगी कीमत मांगने का हक मिलता है।

​2. डेंट, स्क्रैच और पेंट का ध्यान रखें
​कार का बाहरी लुक ही पहला इंप्रेशन जमाता है। अगर गाड़ी की बॉडी पर जगह-जगह डेंट, खरोंच या उखड़ा हुआ पेंट दिखाई देगा, तो कोई भी खरीदार कीमत में भारी कटौती करने की कोशिश करेगा। कार को मार्केट में लिस्ट करने या किसी को दिखाने से पहले छोटे-मोटे डेंट सही करवा लें। बॉडी की सही सफाई, वैक्स पॉलिश या टेफ्लॉन कोटिंग कराने से कार की चमक एकदम नई जैसी लगने लगती है।

​3. इंटीरियर की सफाई और केबिन का माहौल
​अक्सर लोग सिर्फ बाहर की चमक-दमक पर ध्यान देते हैं और अंदरूनी हिस्से को नजरअंदाज कर देते हैं। जबकि गाड़ी चलाने वाला व्यक्ति ज्यादातर समय केबिन में ही बिताता है। डैशबोर्ड, एसी वेंट्स, डोर पैनल्स और मैट्स को गहराई से साफ रखें। अगर सीट कवर फटे या घिसे-पिटे हैं, तो उन्हें बदलवाना एक समझदारी भरा निवेश साबित हो सकता है। इसके अलावा केबिन से किसी भी प्रकार की बदबू नहीं आनी चाहिए। एक साफ-सुथरा और फ्रेश इंटीरियर डील पक्की करने में अहम भूमिका निभाता है।

​4. टायरों की ग्रिप और बैटरी की सेहत
​सौदा तय करते समय खरीदार अक्सर टायरों की घिसावट और बैटरी की उम्र को आधार बनाकर दाम घटाने की कोशिश करते हैं। अगर आपकी कार के चारों टायर अच्छी ग्रिप में हैं और बैटरी की लाइफ बची हुई है, तो सामने वाला व्यक्ति कीमत कम कराने के लिए दबाव नहीं बना पाएगा। अच्छे टायरों और वर्किंग बैटरी का मतलब है कि नए मालिक को तुरंत कोई बड़ा खर्च नहीं करना पड़ेगा, जो आपकी कार की वैल्यू बढ़ा देता है।

​5. पूरे और अपडेटेड कागजात रखें तैयार
​गाड़ी की कागजी कार्रवाई पूरी होना रीसेल प्रोसेस का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। आपकी कार की आरसी (RC), वैलिड इंश्योरेंस पॉलिसी, पॉल्यूशन सर्टिफिकेट (PUC) और यदि लोन था तो उसकी NOC एकदम क्लियर होनी चाहिए। जिस गाड़ी के डॉक्यूमेंट्स पूरी तरह से अपडेट होते हैं, खरीदार उसे बिना किसी झिझक के तुरंत खरीदने को तैयार हो जाते हैं। कागजात में किसी भी तरह की कमी डील को कमजोर कर सकती है।