अजय शास्त्री, बेगूसराय। डंडारी थाना क्षेत्र के राजोपुर गांव के पास पुलिस को देखकर घबराकर बूढ़ी गंडक नदी में कूदे एक युवक की डूबने से मौत हो गई। इस घटना के बाद से पूरे इलाके में तनाव का माहौल बना हुआ है। आक्रोशित ग्रामीणों और परिजनों ने पुलिस प्रशासन पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाते हुए युवक का शव मुख्य सड़क पर रखकर जोरदार हंगामा और प्रदर्शन किया है।

​गिरफ्तारी के डर से नदी में कूदा युवक

​मिली जानकारी के अनुसार, डंडारी थाना क्षेत्र के राजोपुर गांव में पुलिस किसी मामले में एक युवक की गिरफ्तारी के लिए दबिश देने पहुंची थी। पुलिस टीम को अपनी ओर आते देख युवक घबरा गया और गिरफ्तारी से बचने के लिए वहां से भागने लगा। पुलिसकर्मियों ने भी उसे पकड़ने के लिए उसका पीछा किया। इसी आपाधापी और खौफ के माहौल में युवक ने खुद को बचाने के लिए पास की बूढ़ी गंडक नदी में छलांग लगा दी।
​बताया जा रहा है कि नदी में उतरने के बाद युवक गहरे पानी की तरफ चला गया और तैरने या अन्य कारणों से वह खुद को संभाल नहीं पाया। पानी गहरा होने के कारण वह नदी में डूब गया, जिससे उसकी दर्दनाक मौत हो गई। घटना की सूचना मिलते ही आसपास के ग्रामीण और परिजनों की भारी भीड़ मौके पर जमा हो गई। हालांकि, मृतक की पहचान, वह किस आपराधिक या अन्य मामले में वादी था तथा पुलिस किस सिलसिले में उसे पकड़ने आई थी, इन तमाम बिंदुओं पर विस्तृत आधिकारिक बयान सामने आना अभी बाकी है।

​शव सड़क पर रखकर ग्रामीणों का आक्रोश

​युवक की मौत से गुस्साए ग्रामीणों ने पुलिस की कार्यशैली के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। न्याय की मांग को लेकर परिजनों और स्थानीय लोगों ने मृतक के शव को सड़क के बीचों-बीच रखकर यातायात बाधित कर दिया और विरोध-प्रदर्शन शुरू कर दिया। ग्रामीणों का साफ तौर पर आरोप है कि पुलिस की गैर-जिम्मेदाराना कार्रवाई और आक्रामक रवैये के कारण ही यह दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति पैदा हुई, जिसमें एक हंसता-खेलता युवक काल के गाल में समा गया।
​सड़क पर प्रदर्शन और हंगामे के कारण काफी देर तक अफरा-तफरी का माहौल बना रहा। ग्रामीणों की मांग थी कि इस पूरे वाकये के लिए जिम्मेदार पुलिसकर्मियों की भूमिका की उच्चस्तरीय जांच हो और उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।

​पुलिस की कार्यशैली पर उठे गंभीर सवाल

​इस पूरी घटना ने पुलिस की गिरफ्तारी प्रक्रिया और मानवीय दृष्टिकोण पर कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों और बुद्धिजीवियों का यह सवाल है कि क्या पुलिस को इस तरह का दबाव बनाना चाहिए था कि जान बचाने के लिए किसी को नदी में कूदना पड़े? सबसे बड़ा सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या नदी में छलांग लगाने के बाद मौके पर मौजूद पुलिस बल ने युवक को बचाने के लिए तत्काल कोई बचाव अभियान (रेस्क्यू ऑपरेशन) चलाया था या वे केवल तमाशबीन बने रहे?

​फिलहाल, ग्रामीण प्रशासन से निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग पर अड़े हुए हैं। पुलिस के आला अधिकारी स्थिति को नियंत्रित करने और मामले की तह तक जाने के लिए छानबीन में जुट गए हैं। पुलिस के आधिकारिक पक्ष और पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही इस पूरे घटनाक्रम की असल तस्वीर पूरी तरह साफ हो सकेगी।