पटना। ​बिहार पुलिस ड्राइवर भर्ती प्रक्रिया के तहत रिक्त रह गए पदों को भरने की मांग को लेकर अभ्यर्थियों का गुस्सा चरम पर पहुंच गया है। राजधानी पटना के गर्दनीबाग में जारी अनिश्चितकालीन धरने को आज 51 दिन पूरे हो गए हैं। अपनी मांगों को लेकर सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिए अभ्यर्थियों ने आज एक विशाल ‘महाआंदोलन’ का आह्वान किया है, जिसमें 5000 से अधिक उम्मीदवारों के शामिल होने का दावा किया जा रहा है। अनोखे और प्रतीकात्मक प्रदर्शनों के बावजूद सुनवाई न होने से नाराज अभ्यर्थियों ने अब सरकार के खिलाफ आर-पार की जंग छेड़ने की पूरी तैयारी कर ली है।

क्या है मुख्य मांग?

​अभ्यर्थियों की सबसे बड़ी और मुख्य मांग भर्ती प्रक्रिया में रिक्त रह गई 1200 से अधिक महिला सीटों को लेकर है। प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि यदि नियम इसकी अनुमति देते हैं, तो इन खाली सीटों को संबंधित श्रेणी के योग्य पुरुष अभ्यर्थियों से भरा जाना चाहिए। इससे न केवल महत्वपूर्ण सीटें खाली रहने से बचेंगी, बल्कि लंबे समय से तैयारी कर रहे योग्य उम्मीदवारों को भी रोजगार का सुनहरा अवसर मिल सकेगा।
​विभिन्न और अनोखे तरीकों से किया गया विरोध प्रदर्शन
​अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाने के लिए अभ्यर्थियों ने अब तक कई अनोखे और शांतिपूर्ण तरीके अपनाए हैं:

  • ​थाली और चम्मच प्रदर्शन: इससे पहले अभ्यर्थियों ने थाली और चम्मच बजाकर सरकार के खिलाफ अपना कड़ा विरोध जताया था।
  • ​खून से ठप्पा: विरोध को और तीव्र करते हुए अभ्यर्थियों ने अपने अंगूठे के खून से अपने नाम के आगे ठप्पा लगाकर चेतावनी दी थी। उन्होंने कहा था कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो वे और भी कड़े कदम उठाने के लिए बाध्य होंगे।
  • ​गर्दनीबाग में छठ पूजा: अपनी मांगों के समर्थन में अभ्यर्थियों ने गर्दनीबाग धरना स्थल पर ही अनोखे अंदाज में छठ पूजा की। इस दौरान पीली धोती पहने अभ्यर्थियों ने हाथों में सूप और कलश लेकर परंपरा के अनुसार शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया।

​प्रशासन की सख्ती और पुलिस कार्रवाई

​अभ्यर्थियों के आंदोलन को कुचलने या नियंत्रित करने के लिए प्रशासन की तरफ से भी कड़े कदम उठाए गए हैं। बीते 13 अक्टूबर को जब ड्राइवर अभ्यर्थी मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने की योजना बना रहे थे, तो प्रदर्शन से ठीक पहले पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया था। गांधी मैदान के गेट नंबर 10 के पास जुटे उम्मीदवारों को पुलिस ने खदेड़-खदेड़ कर पकड़ा और कई लोगों को गिरफ्तार भी किया गया। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए गांधी मैदान के गेट नंबर 10 पर बैरिकेडिंग कर दी गई थी और भारी मात्रा में पुलिस बल तैनात किया गया था।

​तिरंगा, सूप और कलश के साथ शांतिपूर्ण मार्च की योजना

​प्रशासनिक सख्ती के बावजूद अभ्यर्थियों के हौसले पस्त नहीं हुए हैं। पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, ये उम्मीदवार कलश यात्रा और पैदल मार्च निकालने की तैयारी में थे। छठ पूजा की परंपरा के अनुरूप हाथों में सूप, कलश और देश का राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा लेकर वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज सरकार और प्रशासन के कानों तक पहुंचाना चाहते हैं। अब देखना यह होगा कि इस महाआंदोलन के बाद बिहार सरकार और प्रशासन इन अभ्यर्थियों की मांगों पर क्या रुख अपनाता है।