राकेश चतुर्वेदी, भोपाल। मध्यप्रदेश में कोविड-19 महामारी के दौरान अपनी जान जोखिम में डालकर प्रदेश की जनता की सेवा करने वाले आयुष चिकित्सकों और पैरामेडिकल स्टाफ का संघर्ष लगातार जारी है। नौकरी से हटाए गए लगभग 4000 कोरोना योद्धा अपनी पुनर्बहाली की मांग को लेकर राजधानी भोपाल के नीलम पार्क में पिछले एक माह से अधिक समय से अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। शासन-प्रशासन से लगातार संवाद और मांगों के निराकरण की उम्मीद के बावजूद अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं हो पाया है। ऐसे में अब कोरोना योद्धाओं ने एक बड़ा निर्णय लेते हुए इस वर्ष दीपावली का पर्व अपने परिवारों के साथ घर पर मनाने के बजाय भोपाल के नीलम पार्क में ही मनाने का ऐलान किया है।
बजट का हवाला देकर सेवा से हटाया था
कोविड-19 आयुष चिकित्सक संघ के प्रदेश संयोजक डॉ. अंकित असाटी ने बताया कि प्रदेश के हजारों कोरोना योद्धाओं ने कोविड महामारी के सबसे कठिन दौर में अपनी जान की परवाह किए बिना दिन-रात अस्पतालों, कोविड सेंटरों, आईसीयू, सैंपलिंग, वैक्सीनेशन एवं अन्य स्वास्थ्य सेवाओं में अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन किया था। उस समय उनके कार्यों को कोरोना योद्धा के रूप में सम्मानित किया, लेकिन महामारी का दौर समाप्त होते ही बजट की कमी का हवाला देकर लगभग 4000 अस्थायी कर्मचारियों को सेवा से पृथक कर दिया गया।
डॉ. असाटी ने कहा कि इन कर्मचारियों में आयुष चिकित्सक, स्टाफ नर्स, एएनएम, फार्मासिस्ट, लैब टेक्नीशियन, पैरामेडिकल स्टाफ एवं अन्य स्वास्थ्यकर्मी शामिल हैं। इनमें से अनेक परिवार आज आर्थिक संकट और भविष्य की अनिश्चितता से जूझ रहे हैं। कोरोना काल में प्रदेश की जनता की सेवा करने वाले इन कर्मचारियों को आज अपने ही अधिकारों के लिए सड़कों पर संघर्ष करना पड़ रहा है।
परिवार से दूर रहकर मनाएंगे दीपावली
उन्होंने बताया कि दीपावली प्रत्येक परिवार के लिए खुशियों, मिलन और उत्साह का पर्व है, लेकिन इस बार कोरोना योद्धाओं ने अपने परिवारों से दूर रहकर नीलम पार्क में ही दीपावली मनाने का निर्णय लिया है। उनका कहना है कि जब तक सरकार उनकी पीड़ा और मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं करती, पुनर्बहाली के संबंध में ठोस निर्णय नहीं लेती, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।
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