शब्बीर अहमद, भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में साइबर ठगों के हौसले किस कदर बुलंद हैं, इसका अंदाजा हाल ही में सामने आए आंकड़ों से लगाया जा सकता है। शहर में ऑनलाइन फ्रॉड और साइबर ठगी के मामले लगातार विकराल रूप लेते जा रहे हैं। स्थिति यह है कि ठगों ने महज कुछ महीनों में ही शहरवासियों की करोड़ों की गाढ़ी कमाई पर डाका डाल लिया है।
9 महीने में 35.31 करोड़ की चपत
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, इस साल 1 जनवरी से 30 सितंबर 2026 तक यानी महज 273 दिनों के भीतर भोपाल के लोग साइबर ठगी के जाल में फंसकर 35.31 करोड़ रुपये गंवा चुके हैं। इस दौरान पुलिस के पास कुल 4,179 शिकायतें दर्ज कराई गईं, लेकिन हैरानी की बात यह है कि इतनी बड़ी संख्या में शिकायतें मिलने के बावजूद सिर्फ 943 मामलों में ही एफआईआर (FIR) दर्ज हो पाई है।
सालों-साल के आंकड़े कर रहे हैं हैरान
साइबर ठगी के मामलों में पुलिसिया कार्रवाई और शिकायतों का यह अंतर नया नहीं है। पिछले कुछ वर्षों के आंकड़े भी कुछ ऐसी ही कहानी बयां करते हैं:
- वर्ष 2019 से 2021 के बीच कुल 8,614 शिकायतें मिली थीं, जिन पर महज 400 एफआईआर दर्ज की गईं।
- वर्ष 2023 में 6,087 शिकायतें आने के बाद केवल 50 मामलों में ही एफआईआर दर्ज हो सकी थी।
- इसी तरह वर्ष 2025 में 4,724 शिकायतें मिलने के बावजूद महज 60 एफआईआर ही दर्ज की गईं।
ठगी का शिकार हो रहे हैं युवा
साइबर अपराधियों के इस जाल में सबसे ज्यादा चिंताजनक बात यह है कि ठगी का शिकार होने वालों में युवाओं की संख्या काफी ज्यादा है। डिजिटल ट्रांजैक्शन, सोशल मीडिया और ऑनलाइन ट्रेडिंग के चक्कर में युवा आसानी से जालसाजों के झांसे में आ रहे हैं।
बढ़ते मामलों ने जहां एक तरफ शहरवासियों की नींद उड़ा दी है, वहीं दूसरी ओर पुलिस और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। साइबर एक्सपर्ट्स का मानना है कि ऑनलाइन ठगी से बचने के लिए जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार है।+
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