संजय पाटीदार, भोपाल। राजधानी भोपाल में ‘डिजिटल अरेस्ट’ के जरिए साइबर ठगी का एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। यहां शातिर जालसाजों ने एक महिला को फर्जी पुलिस अफसर बनकर वीडियो कॉल किया और खाते में 7 करोड़ रुपए की टेरर फंडिंग आने का खौफ दिखाकर 35 लाख रुपए ऐंठ लिए। हैरान करने वाली बात यह है कि पीड़ित महिला ने घटना के तुरंत बाद शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन पुलिस को FIR दर्ज करने में पूरे 1 साल का समय लग गया। अब गोविंदपुरा थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की है।
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वीडियो कॉल कर दिखाया 7 करोड़ की टेरर फंडिंग का डर
जानकारी के अनुसार जालसाजों ने महिला को खुद को बड़ा पुलिस अधिकारी बताकर वीडियो कॉल किया था। उन्होंने महिला को डराते हुए कहा कि उसके बैंक खाते में 7 करोड़ रुपए की टेरर फंडिंग की राशि आई है, जिसकी वजह से उस पर कानूनी कार्रवाई होने जा रही है। गिरफ्तारी और बदनामी के डर से महिला घबरा गई।
5 किस्तों में ऐंठे 35 लाख रुपए
जालसाजों ने ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर महिला को लगातार अपनी निगरानी में रखा और मामले को रफा-दफा करने व जांच से बचने के एवज में रकम की मांग की। डरी-सहमी महिला ने जालसाजों के बताए खातों में कुल 5 अलग-अलग किस्तों में 35 लाख रुपए ट्रांसफर कर दिए।
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2025 में हुई थी ठगी, 12 महीने बाद दर्ज हुई FIR
यह पूरी घटना 23 सितंबर 2025 की है। ठगी का अहसास होने पर महिला ने 26 सितंबर 2025 को साइबर क्राइम शाखा में इसकी शिकायत दर्ज कराई थी। हालांकि, साइबर पुलिस द्वारा मनी ट्रेल खंगालने और प्राथमिक जांच की प्रक्रिया के नाम पर मामला करीब 12 महीने तक अटका रहा। अब करीब एक साल बाद पुलिस ने गोविंदपुरा थाने में अज्ञात जालसाजों के खिलाफ केस दर्ज किया है।
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