(सुधीर दंडोतिया की कलम से)

सहमति थी सूखा था, दाल न गली तो बारिश आई

बात भोपाल नगर निगम की है… जहां बारिश पूर्व सड़क-नालियों के ताबड़तोड़ भूमिपूजन किए गए। मानसून झूमा इसके बाद भी एक के बाद एक सड़कों के निर्माण होना शुरू हो गए। इस बीच निगम अफसर, इंजीनियर और क्षेत्रीय पार्षदों के बीच निर्माण को लेकर बनी सहमति कुछ स्थानों में असहमति में बदली, तो सड़क निर्माण में बारिश बाधा बन बैठी। कुछ स्थानों पर जांच के बाद सड़क निर्माण का काम रोक दिया गया, तो कुछ स्थानों पर काम इसलिए रोक दिया गया कि बारिश के बीच सड़कें बनती ही नहीं है। अब सहमति के बाद निर्मित हुई असहमति का खामियाजा और कोई नहीं बल्कि लोग भुगत रहे हैं।

चुनावी भाईयों की बाढ़

वैसे तो नेता जनता से अपना कई तरह से रिश्ता जोड़ते और गिनाते आते हैं, लेकिन इस बार भाइयों की बाढ़ सी आ गई है। बीजेपी हो या कांग्रेस स्थानीय विधायकों के साथ दावेदार राखी के त्यौहार के बीच खुद को ऐसे पेश करने में जुटे हुए हैं। जैसे महिलाओं के सच्चे भाई सिर्फ भैया ही हों। राखी के पहले और राखी के बाद इन भाइयों ने अपने-अपने क्षेत्र में बढ़े आयोजन तैयार भी कर रखे हैं और चुनावी सीजन में ये भुनाने का प्रयास किया जा रहा है कि किसके आयोजन में राखी बांधने कितनी अधिक बहनें पहुंचती हैं।

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लड़ना हो तो पर्सनल तो बता दो

कांग्रेस हारी सीटों पर छह महीने पहले प्रत्याशी घोषित करने का दावा करती रही, अब तक कांग्रेस की तो कोई सूची नहीं आई लेकिन प्रत्याशी चयन में बीजेपी ने बाजी मार दी। भोपाल की एक सीट से खुद को प्रत्याशी मान बैठे नेताजी कांग्रेस के दिग्गज नेताओं से ये कहते नजर आ रहे हैं कि आप लोग मेरा टिकट फाइनल मानकर चल रहे हैं। मैंने तैयारी भी शुरू कर दी है।लेकिन मेरा लड़ना तय हो तो पर्सनल तो बता दो।

लॉबिंग का खेल शुरू

चर्चा जोरों पर है एक बार फिर मंत्रिमंडल विस्तार हो सकता है। ये बल मिला मुख्यमंत्री शिवराज के बयान से, साहब के बयान के बाद मंत्रिमंडल में शामिल होने की हसरते पाल रहे विधायक नई ड्रेस सिलवाने के बाद बड़े नेताओं से जोड़ घटाव में भी जुट गए है। खबर है की इस बार एससी या फिर एसटी वर्ग से किसी को मंत्री बनाया जा सकता है। अब जगह एक है और दावेदार दो वर्ग, देखना ये होगा किसकी किस्मत खुलती है।

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चर्चा जोरों पर

मध्यप्रदेश कांग्रेस मीडिया विभाग में जल्द कुछ बड़ा होने वाला है। जिसके चलते मीडिया टीम की बेचैनियां बढ़ गई है। क्योंकि ये बदलाव एमपी स्तर पर नहीं दिल्ली से होने वाला है। खबर तो यहां तक है जल्द दिल्ली से एक टीम भोपाल आने वाली है, जो चुनाव में मीडिया विभाग की पूरी नकल अपने पास रखेगी। चर्चा जोरों पर है एक गुट ने दिल्ली में मीडिया विभाग की शिकायत की जिसके बाद अलाकामान ने चुनाव में मीडिया विभाग में लेने का फैसला लिया है।

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