कुंदन कुमार, पटना/मुंगेर। एक दौर था, जब गांव के किसी गरीब या किसान को अगर अपना जाति प्रमाण पत्र बनवाना हो, राशन कार्ड में नाम जुड़वाना हो या खेती के लिए बीज चाहिए हो, तो उसे अपनी दिहाड़ी छोड़कर ब्लॉक और जिला मुख्यालयों के अनगिनत चक्कर काटने पड़ते थे। अधिकारियों को ढूंढ़ने में ही पूरा दिन निकल जाता था। लेकिन अब बिहार के गांवों में एक ऐसी छत तैयार हो गई है, जिसने ग्रामीणों की इस सबसे बड़ी पीड़ा को खत्म कर दिया है। यह छत है, पंचायत सरकार भवन।

भुना ग्राम पंचायत में बना यह नया पंचायत सरकार भवन आज ग्रामीणों के लिए सिर्फ एक सरकारी इमारत नहीं, बल्कि उनके सुकून और सम्मान का एक बहुत बड़ा केंद्र बन गया है, जहां बैंक से लेकर बच्चों की लाइब्रेरी तक सब कुछ मौजूद है।

किसानों का दर्द हुआ खत्म

गांव की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हमारे किसान होते हैं। भुना पंचायत के किसान सलाहकार विभाकर बेनीपुष्प अपना अनुभव साझा करते हुए बताते हैं कि पहले किसानों को छोटी-छोटी सलाह या मदद के लिए अधिकारियों को दूर-दूर तक खोजना पड़ता था। लेकिन अब ऐसा नहीं है।

विभाकर कहते हैं, “अब हम पंचायत सरकार भवन में बैठते हैं। किसान सीधे यहीं आते हैं और एक ही छत के नीचे उनका सारा काम हो जाता है। चाहे फार्मर आईडी बनवाना हो, बिहार कृषि ऐप पर नाम जुड़वाना हो, कृषि यंत्रीकरण का काम हो या धान के बीजों का वितरण,किसानों को अब प्रखंड या जिले का चक्कर बिल्कुल नहीं लगाना पड़ता।

स्थायी पता नहीं होने से भटकते थे लोग

अक्सर पंचायतों का अपना कोई स्थायी कार्यालय नहीं होने के कारण काम जहां-तहां से चलता था, जिससे आम लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। ग्राम पंचायत भुना के पंचायत सचिव आशीष काजी इस जमीनी परेशानी का जिक्र करते हुए कहते हैं, “पहले स्थायी आवास नहीं था, जिसके चलते पंचायत का कार्यालय जहां-तहां चलता था और लोगों को बहुत परेशानी होती थी। लेकिन पंचायत सरकार भवन बनने से अब जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, जाति-आवासीय-आय प्रमाण पत्र, राशन और पेंशन से लेकर कबीर अंत्येष्टि तक का लाभ लोगों को यहीं मिल रहा है।”

बच्चों के लिए लाइब्रेरी और बुजुर्गों के लिए बैंक-पोस्ट ऑफिस

इस भवन की सबसे खूबसूरत बात यह है कि इसे सिर्फ एक दफ्तर तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि इसे पूरे गांव की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाया गया है। आशीष काजी बताते हैं कि इसी भवन के अंदर गांव वालों के लिए पोस्ट ऑफिस और बैंक की भी सुविधा उपलब्ध करा दी गई है।

सबसे ज्यादा दिल को छूने वाली बात है यहां के बच्चों के लिए बनी लाइब्रेरी । आशीष बताते हैं, “यहां एक शानदार पुस्तकालय की भी सुविधा है, जिसमें गांव के बच्चे सुबह 9 बजे आकर शाम 5 बजे तक शांति से अपना पठन-पाठन का काम करते हैं।” यह लाइब्रेरी गांव के उन बच्चों के लिए एक बहुत बड़ा वरदान है, जिनके पास घर में पढ़ने का माहौल या साधन नहीं होता।

ग्रामीणों की इस सहूलियत और पंचायत के इस शानदार विकास के लिए विभाकर और आशीष दोनों ही राज्य के सीएम सम्राट चौधरी का दिल से आभार व्यक्त करते हैं। आज भुना का यह पंचायत सरकार भवन साबित कर रहा है कि जब सरकार की योजनाएं सही मायनों में धरातल पर उतरती हैं, तो लोगों का सिर्फ समय और पैसा नहीं बचता, बल्कि उन्हें एक नई उम्मीद और अपनापन भी मिलता है।

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