मधुबनी। बिहार के स्वास्थ्य विभाग में एक बार फिर फर्जीवाड़े का एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। मधुबनी जिले के मधेपुर रेफरल अस्पताल में एक फर्जी ‘मास्टर आफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन’ (MBA) की डिग्री के सहारे अस्पताल प्रबंधक के पद पर नौकरी हथियाने का सनसनीखेज मामला उजागर हुआ है। पोल खुलते ही आरोपी सरकारी खजाने से लाखों रुपये लेकर फरार हो गया।
फर्जी डिग्री के सहारे हासिल की थी नौकरी
आरोपी की पहचान सहरसा जिले के सिमरी बख्तियारपुर प्रखंड स्थित मोरकाही गांव निवासी चिरंजीव कुमार चिराग (पिता – सियालाल प्रसाद) के रूप में हुई है। जानकारी के अनुसार, चिरंजीव ने मार्च 2023 में मधेपुर रेफरल अस्पताल में अस्पताल प्रबंधक के पद पर योगदान दिया था। उसने अपनी नियुक्ति के समय जो एमबीए की डिग्री और शैक्षणिक प्रमाणपत्र सौंपे थे, वे पूरी तरह फर्जी थे। उसने लंबी अवधि तक अपनी इस फर्जी पहचान और दस्तावेजों के बल पर विभाग को धोखे में रखा।
जांच में खुला राज और सेवा समाप्त
यह फर्जीवाड़ा तब सामने आया जब विभाग ने दस्तावेजों के सत्यापन की प्रक्रिया शुरू की। अगस्त 2024 में जब उसके प्रमाणपत्रों की उच्चस्तरीय जांच कराई गई, तो उसकी एमबीए की डिग्री फर्जी पाई गई। मामले की पुष्टि होने के बाद राज्य स्वास्थ्य समिति, बिहार के आदेश और जिला स्वास्थ्य समिति के निर्देशानुसार उसकी सेवा तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी गई।
वेतन के 4.67 लाख लेकर हुआ फरार
विभाग की ओर से कार्रवाई की भनक लगते ही शातिर चिरंजीव कुमार सेवा समाप्ति के ठीक दिन ही अस्पताल से गायब हो गया। विभागीय जांच में यह बात खुलकर सामने आई कि उसने अपने कार्यकाल के दौरान वेतन और अन्य मदों के रूप में कुल चार लाख सड़सठ हजार एक सौ बारह (4,67,112) रुपये सरकारी खजाने से अवैध रूप से प्राप्त किए थे।
पुलिस में मामला दर्ज, वसूली की कार्रवाई तेज
अस्पताल प्रशासन ने सेवा समाप्ति के बाद उसे लगातार पत्र भेजकर यह पूरी राशि सरकारी खाते में जमा करने का आदेश दिया। लेकिन आरोपी ने एक भी रुपया वापस नहीं किया। इसके बाद प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. राजू कुमार रंजन ने 29 सितंबर को मधेपुर थानाध्यक्ष को आधिकारिक पत्र भेजकर एफआईआर दर्ज करने का अनुरोध किया।
अस्पताल प्रशासन के दूसरे पत्र के अनुसार, इस मामले में मधेपुर थाना में कांड संख्या 271/26 दर्ज किया जा चुका है। पुलिस अब आरोपी की तलाश कर रही है और सरकारी धन की वसूली के लिए कानूनी शिकंजा कसा जा रहा है। इस घटना ने स्वास्थ्य विभाग की नियुक्ति और प्रमाणपत्र सत्यापन की प्रणाली पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

