पटना। बिहार में नकली और घटिया दवाओं के कारोबार पर नकेल कसने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने एक बेहद सराहनीय और सख्त कदम उठाया है। अब राज्य के आम नागरिक नकली, घटिया और निर्धारित गुणवत्ता मानकों पर खरी न उतरने वाली (NSQ – Not of Standard Quality) दवाओं के खिलाफ सीधे विभाग तक अपनी बात पहुंचा सकेंगे। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग ने एक विशेष निगरानी और शिकायत निवारण व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ करते हुए आधिकारिक संपर्क सूत्र जारी किए हैं।
इस पहल के तहत विभाग ने एक विशेष ई-मेल आईडी और एक हेल्पलाइन फोन नंबर की शुरुआत की है, ताकि लोग बिना किसी डर के अपनी शिकायत दर्ज करा सकें।
शिकायत दर्ज कराने के नियम और समय-सीमा
आम नागरिक नकली या सब-स्टैंडर्ड दवाओं से जुड़ी कोई भी जानकारी या शिकायत इन माध्यमों से साझा कर सकते हैं। इनकी प्रक्रिया और समय-सारणी इस प्रकार है:
- ई-मेल के माध्यम से: नागरिक किसी भी समय, यानी 24 घंटे में कभी भी ई-मेल के जरिए अपनी शिकायत या सुराग विभाग को भेज सकते हैं।
- फोन कॉल के माध्यम से: हेल्पलाइन नंबर पर कामकाजी दिनों यानी सोमवार से शुक्रवार के बीच संपर्क किया जा सकता है। इसके लिए समय सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक निर्धारित किया गया है।
- गोपनीयता की पूरी गारंटी: इस व्यवस्था की सबसे बड़ी खासियत यह है कि शिकायतकर्ता की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी। विभाग का यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि लोग बिना किसी भय या संकोच के बेझिझक होकर इस सामाजिक और स्वास्थ्य हित से जुड़े अभियान में अपनी भागीदारी सुनिश्चित कर सकें।
स्वास्थ्य मंत्री के सख्त निर्देश
बिहार के स्वास्थ्य मंत्री निशांत ने राज्य में दवाओं की वैज्ञानिक जांच, उनके गुणवत्ता मानकों के कड़ाई से अनुपालन, नियमित निरीक्षण और नकली व अवमानक दवाओं के कारोबार में लिप्त लोगों के खिलाफ प्रभावी कानूनी कार्रवाई करने के कड़े निर्देश दिए हैं।
स्वास्थ्य विभाग का मुख्य उद्देश्य पारदर्शी निगरानी व्यवस्था स्थापित करना, समयबद्ध तरीके से शिकायतों की जांच करना और जनभागीदारी को बढ़ावा देना है। इसके साथ ही, आम नागरिकों के बीच गुणवत्तापूर्ण दवाओं के प्रति जागरूकता फैलाना भी इस अभियान का अहम हिस्सा है। इस नई व्यवस्था के लागू होने से न केवल आम जनता के स्वास्थ्य की रक्षा होगी, बल्कि चिकित्सा व्यवस्था में पारदर्शिता और विश्वास भी मजबूत होगा।

