Bihar Flood: बिहार में एक बार फिर बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। नेपाल के तराई क्षेत्र में लगातार हो रही तेज बारिश के बाद गंडक नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ा है। वाल्मीकिनगर गंडक बराज से 5 लाख 43 हजार क्यूसेक से अधिक पानी छोड़े जाने के बाद पश्चिमी और पूर्वी चंपारण के तटवर्ती इलाकों में हालात बिगड़ने लगे हैं। कई गांवों और सड़कों पर बाढ़ का पानी पहुंच गया है।

17 जिलों में फिर से बाढ़ का खतरा

नेपाल के तराई इलाकों में लगातार हो रही बारिश का असर बिहार की नदियों पर भी दिख रहा है। गंडक और कोसी नदी का जलस्तर बढ़ने से स्थिति गंभीर बनी हुई है। इससे 17 जिलों के करीब 6 गांव टापू में तब्दील हो गए हैं, जबकि लगभग 500 घर पानी में डूब गए हैं। बेगूसराय में पिछले 24 घंटे के दौरान गंगा के जलस्तर में 2 सेंटीमीटर की बढ़ोतरी हुई है। आने वाले समय में जलस्तर और बढ़ने की संभावना है। गंडक, बागतमी, सोन समेत गंगा नदी का जलस्तर एक बार फिर बढ़ने लगा है।

पूर्वी चंपारण के कई गांवों में घुसा बाढ़ का पानी

लगातार दो दिनों से गंडक में बड़ी मात्रा में पानी छोड़े जाने का असर पूर्वी चंपारण के अरेराज अनुमंडल के गंडक दियारा और आसपास के तटीय इलाकों में दिखने लगा है। नदी का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर गया है। पानी बढ़ने से सरेया, मिश्रौलिया, पुछरिया, बिंद टोली और नवादा समेत कई गांवों के लोगों की चिंता बढ़ गई है। खेतों में पानी पहुंचने लगा है, जबकि निचले इलाकों में घरों के जलमग्न होने का खतरा बना हुआ है।

पश्चिमी चंपारण में कई इलाकों में घुसा बाढ़ का पानी

गंडक का असर पश्चिमी चंपारण में भी लगातार बढ़ रहा है। वाल्मीकिनगर, बगहा-2, बगहा-1, पिपरासी, मधुबनी, ठकराहा, भितहा, योगापट्टी, बैरिया और नौतन के दियारा इलाकों में कई घरों में पानी घुस गया है। बगहा शहर के कुछ हिस्सों तक भी बाढ़ का पानी पहुंचने की बात सामने आई है।

वहीं, बगहा-वाल्मीकिनगर मुख्य सड़क पर भी कई जगह पानी जमा हो गया है। इससे लोगों के आवागमन में परेशानी बढ़ गई है। प्रशासन की ओर से निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और जरूरत पड़ने पर सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी जा रही है।

वीटीआर में भी पहुंचा पानी, बाहर निकल रहे जंगली जानवर

बाढ़ का असर वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (VTR) के जंगलों में भी दिखाई देने लगा है। जंगल के कुछ हिस्सों में पानी फैलने के बाद जंगली जानवर ऊंचे और सुरक्षित स्थानों की ओर बढ़ रहे हैं। ऐसे में जंगल से सटे गांवों में रहने वाले लोगों के बीच भी चिंता बढ़ गई है। ऐसे में अब यह स्थिति वन विभाग और स्थानीय प्रशासन के लिए दोहरी चुनौती बन गई है। एक तरफ बाढ़ प्रभावित लोगों को सुरक्षित रखना है, वहीं दूसरी तरफ वन्यजीवों की गतिविधियों पर भी नजर रखनी पड़ रही है।

बागमती और कोसी का भी बढ़ रहा जलस्तर

गंडक के अलावा बागमती और कोसी नदी के जलस्तर में भी बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। पूर्वी चंपारण के साथ मधुबनी, दरभंगा, सुपौल और सहरसा के कई इलाकों में भी बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। लगातार बढ़ते जलस्तर को देखते हुए जल संसाधन विभाग ने संबंधित अधिकारियों को अलर्ट रहने का निर्देश दिया है।

अधिकारियों को अलर्ट रहने का निर्देश

बाढ़ के संभावित खतरे को देखते हुए प्रशासन की ओर से निचले इलाके में बसे लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। स्थानीय स्तर पर लोगों को अचानक जलस्तर बढ़ने की स्थिति में सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए जागरूक किया जा रहा है, जिससे आपातकाल हालात में किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके। इसके साथ ही संबंधित अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में सक्रिय रहने और किसी भी हालात से निपटने के लिए तैयार रहने का निर्देश दिया गया है।

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