पटना। बिहार के सरकारी स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों के लिए अवकाश के नियमों में बड़ा बदलाव किया गया है। शिक्षा विभाग ने पारदर्शिता बढ़ाने और फर्जी उपस्थिति पर लगाम कसने के उद्देश्य से पूरी अवकाश प्रणाली को डिजिटल कर दिया है। अब शिक्षक मौखिक या कागजी आवेदन के माध्यम से छुट्टी नहीं ले सकेंगे, बल्कि सभी प्रकार के अवकाश के लिए ई-शिक्षाकोष पोर्टल या मोबाइल ऐप का उपयोग करना अनिवार्य होगा। विभाग के इस नए कदम से प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता आएगी और जवाबदेही तय होगी।

​ई-शिक्षाकोष पोर्टल से होगा आवेदन

​नई व्यवस्था के तहत शिक्षकों को किसी भी प्रकार की छुट्टी के लिए केवल ई-शिक्षाकोष पोर्टल या डेडीकेटेड मोबाइल ऐप पर ही आवेदन करना होगा। विभाग ने स्पष्ट किया है कि किसी भी स्थिति में मौखिक या पारंपरिक कागजी आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे। आकस्मिक अवकाश (Casual Leave) और विशेष अवकाश के मामलों पर प्रधानाध्यापक या प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी (BEO) को उसी दिन निर्णय लेना होगा। इसके अलावा, मातृत्व अवकाश, शिशु देखभाल अवकाश और चिकित्सीय (मेडिकल) अवकाश से जुड़े आवेदन तीन कार्य दिवसों के भीतर जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) के पास अग्रेषित किए जाएंगे। यदि इस अवधि में कोई देरी होती है, तो आवेदन स्वतः ही डीईओ के पास पहुंच जाएगा, और डीईओ को अधिकतम सात कार्य दिवसों के भीतर इस पर अपनी स्वीकृति देनी होगी।

​नए शिक्षकों के लिए ईएल के नियम

​विभाग के नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, सेवा में नए शामिल होने वाले शिक्षकों को शुरुआती तीन साल तक उपार्जित अवकाश (Earned Leave – EL) की सुविधा नहीं मिलेगी। इसके साथ ही, यदि कोई शिक्षक लगातार 11 महीने काम करता है, तो उसे 1 महीने की बिना वेतन छुट्टी का प्रावधान किया गया है। कोई भी शिक्षक एक बार में अधिकतम दो महीने तक का ही अवकाश ले सकेगा। बिहार सेवा संहिता के नियम-152 के तहत छुट्टी को किसी भी कर्मचारी का मौलिक अधिकार नहीं माना गया है। यदि कोई शिक्षक बिना पूर्व अनुमति के गैर-हाजिर रहता है, तो उसका वेतन स्थगित कर दिया जाएगा और इसे सेवा में व्यवधान (टूट) माना जाएगा।

​शिक्षा मंत्री की दो टूक

​इस नई व्यवस्था पर प्रतिक्रिया देते हुए शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने कहा कि सरकार का मुख्य उद्देश्य शिक्षकों के लिए छुट्टी की प्रक्रिया को बेहद सरल, सुगम और पारदर्शी बनाना है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सभी आवेदन ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से ही संसाधित किए जाएंगे, जिससे अधिकारियों की जवाबदेही भी तय होगी। यदि कोई भी संबंधित अधिकारी तय की गई समय-सीमा का उल्लंघन करता पाया जाता है, तो उसके खिलाफ विभाग द्वारा सीधी और कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।