पटना। बिहार में सितंबर 2026 के दौरान हुई भारी अतिवृष्टि, नदियों के बांधों के फाटक खोले जाने से आई भयावह बाढ़ और भीषण ओलावृष्टि ने राज्य के कई जिलों में तबाही मचाई है। इन प्राकृतिक आपदाओं के कारण किसानों की खड़ी फसलें पूरी तरह से बर्बाद हो चुकी हैं और वे गहरे आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। प्रभावित किसानों को राहत देने के लिए राज्य सरकार ने कृषि इनपुट अनुदान योजना के तहत ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए हैं, लेकिन आवेदन प्रक्रिया में आ रही तकनीकी और नीतिगत बाधाओं ने किसानों की चिंताओं को और बढ़ा दिया है। इस संबंध में पूर्व कृषि मंत्री और सांसद सुधाकर सिंह ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर तुरंत हस्तक्षेप करने की मांग की है।
पोर्टल की तकनीकी खामियां और कम समय-सीमा
सुधाकर सिंह ने अपने पत्र में उजागर किया कि फसल क्षति के मुआवजे के लिए जारी किया गया आधिकारिक ऑनलाइन पोर्टल ठीक से काम नहीं कर रहा है। पोर्टल में बार-बार आ रही तकनीकी गड़बड़ियों के कारण किसानों को आवेदन फॉर्म भरने और दस्तावेज जमा करने में अत्यधिक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इसके साथ ही, आवेदन के लिए मात्र सात दिनों की बेहद कम समय-सीमा तय की गई है। पोर्टल के धीमे चलने और सर्वर डाउन रहने की स्थिति में यह सात दिनों का समय किसानों के लिए बिल्कुल अपर्याप्त साबित हो रहा है।
ओलावृष्टि क्षति के विकल्प का अभाव
पत्र में एक और गंभीर विसंगति की ओर ध्यान आकर्षित किया गया है। ऑनलाइन आवेदन पोर्टल में ओलावृष्टि से हुई फसल क्षति को दर्ज करने के लिए कोई स्पष्ट विकल्प या प्रावधान मौजूद नहीं है। इसके परिणामस्वरूप, ओलावृष्टि से प्रभावित किसान अपनी वास्तविक क्षति का ब्योरा दर्ज नहीं कर पा रहे हैं, जिससे उनके अनुदान के लाभ से वंचित होने का बड़ा खतरा पैदा हो गया है।
पारदर्शी व किसान-हितैषी कदम उठाने की मांग
सुधाकर सिंह ने जोर देकर कहा कि आपदा की मार झेल रहे पात्र किसान यदि पोर्टल की कमियों के कारण वंचित रह जाते हैं, तो यह उनके साथ अन्याय होगा। उन्होंने मांग की है कि संबंधित विभाग को तत्काल निर्देश देकर पोर्टल की तकनीकी खामियों को दूर किया जाए, ओलावृष्टि की क्षति को आवेदन में शामिल किया जाए और आवेदन की समय-सीमा में विस्तार किया जाए ताकि हर पीड़ित किसान को सरकारी सहायता मिल सके।

