बिहार के सरकारी प्राथमिक और मध्य विद्यालयों में मिड-डे मील (मध्याह्न भोजन योजना) के संचालन को लेकर शिक्षा विभाग ने एक बड़ा और दूरदर्शी फैसला लिया है। अब राज्य के स्कूलों में महंगे कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के स्थान पर घरेलू एलपीजी सिलेंडर का उपयोग किया जाएगा। इस ऐतिहासिक बदलाव से बच्चों की भोजन की मात्रा या गुणवत्ता से समझौता किए बिना संचालन लागत में भारी कमी आएगी।
आर्थिक बचत और वित्तीय आंकड़े
शिक्षा विभाग के इस कदम से राज्य के सरकारी खजाने पर पड़ने वाला वित्तीय बोझ काफी कम होगा। कमर्शियल सिलेंडर और घरेलू सिलेंडर की कीमतों में लगभग दो हजार रुपये का अंतर है। आंकड़ों के अनुसार:
- राज्य के 45,389 स्कूलों को 90,778 नए घरेलू एलपीजी कनेक्शन उपलब्ध कराए जाएंगे।
- इस पूरी प्रक्रिया और कनेक्शन पर लगभग 30 करोड़ का खर्च आएगा।
- प्रत्येक स्कूल को दो-दो घरेलू एलपीजी सिलेंडर दिए जाएंगे।
- इस व्यवस्था से शिक्षा विभाग को हर महीने 20 करोड़ (18 करोड़ से अधिक) की सीधी बचत होगी।
सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम और चुनौतियां
रसोइयों और बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि है। इसके लिए विभाग ने कड़े मानक तय किए हैं:
- रसोईघरों में आईएसआई मार्क रेगुलेटर, स्टील वायर सेफ्टी पाइप और 700 की फायर वॉल लगाई जाएगी।
- खाना बनाने वाली रसोइयों को ब्लॉक स्तर पर विशेष सुरक्षा ट्रेनिंग दी जाएगी।
हालांकि, इस बदलाव के क्रियान्वयन में कुछ रुकावटें भी हैं। अब तक केवल 24,000 सिलेंडर ही वापस हुए हैं, और राज्य के 5,000 स्कूल बाढ़ से प्रभावित हैं, जिससे आपूर्ति में मामूली चुनौती आ रही है।
धुआं-मुक्त रसोई और स्वास्थ्य लाभ
यह निर्णय केवल वित्तीय अनुशासन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जन-स्वास्थ्य सुरक्षा का एक बेहतरीन संतुलन है। ग्रामीण क्षेत्रों में कमर्शियल सिलेंडर आसानी से उपलब्ध न होने के कारण कई स्कूल लकड़ी और कोयले पर खाना पकाने के लिए मजबूर थे। इससे निकलने वाले जहरीले धुएं से रसोइयों और बच्चों में गंभीर श्वसन बीमारियां होने का खतरा रहता था। अब घरेलू सिलेंडरों की सुलभता से स्कूल की रसोई पूरी तरह धुआं-मुक्त होगी, रसोइयों का स्वास्थ्य सुधरेगा और राज्य के 1.10 करोड़ बच्चों को बिना किसी बाधा के समय पर गर्म और पौष्टिक भोजन मिल सकेगा।

