बिहार का कैमूर जिला अपनी अद्भुत प्राकृतिक सुंदरता, कल-कल बहते जलप्रपातों और समृद्ध लोक संस्कृति के लिए देश-दुनिया में अपनी एक अलग पहचान बनाने जा रहा है। इसी उद्देश्य के तहत 6 अक्टूबर को कैमूर के मां मुंडेश्वरी वन्यप्राणी इको पार्क में भव्य ‘धारा महोत्सव’ का आयोजन किया जा रहा है। इस कार्यक्रम की शुरुआत दोपहर 2:30 बजे से होगी, जिसकी तैयारियां वन विभाग द्वारा जोर-शोर से शुरू कर दी गई हैं।
वन्यप्राणी सप्ताह के तहत प्रकृति संरक्षण का संदेश
प्रत्येक वर्ष 2 से 8 अक्टूबर तक देश भर में वन्यप्राणी सप्ताह मनाया जाता है। इसी पावन श्रृंखला के अंतर्गत कैमूर वन प्रमंडल, भभुआ की ओर से इस विशेष महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। इस वर्ष के धारा महोत्सव की बेहद खास थीम ‘हर धारा की अपनी कहानी’ रखी गई है। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य न सिर्फ कैमूर के मनमोहक जलप्रपातों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लोकप्रिय बनाना है, बल्कि आम जनमानस और युवाओं को प्रकृति, जल स्रोतों और वन्यजीवों के संरक्षण के प्रति जागरूक करना भी है।
मानसून के बाद अपने चरम पर होता है पहाड़ियों का सौंदर्य
वर्षा ऋतु के समापन के बाद कैमूर की हरी-भरी पहाड़ियों और जंगलों का सौंदर्य देखते ही बनता है। यहां स्थित कई प्रसिद्ध जलप्रपात इस दौरान अपनी प्राकृतिक सुंदरता के चरम पर होते हैं।
करकटगढ़, तेल्हाड़ कुंड, बंसीखोह और करमचट जैसे प्रसिद्ध जलप्रपात पर्यटकों के मुख्य आकर्षण केंद्र हैं।
कैमूर वन्यजीव अभयारण्य की गोद में बसे ये स्थल अपनी जैव विविधता और अनूठी स्थानीय संस्कृति के लिए भी जाने जाते हैं।
हालांकि, अपार प्राकृतिक वैभव होने के बावजूद इन स्थलों को वह पहचान नहीं मिल पाई है जिसके वे हकदार हैं। इस महोत्सव के माध्यम से इस कमी को दूर करने का सार्थक प्रयास किया जा रहा है।
लघु वृत्तचित्र, ट्रैकिंग मार्ग और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां
महोत्सव के दौरान आने वाले पर्यटकों और प्रकृति प्रेमियों के लिए विशेष प्रबंध किए गए हैं।
- लघु वृत्तचित्र: इसके माध्यम से कैमूर के सभी प्रमुख प्राकृतिक स्थलों की जानकारी प्रदर्शित की जाएगी।
- सूचना केंद्र: पर्यटकों को जिले के बेहतरीन ट्रैकिंग मार्गों और इको-टूरिज्म स्थलों की पूरी जानकारी देने के लिए एक विशेष सूचना केंद्र स्थापित किया जाएगा।
- लोक संस्कृति का प्रदर्शन: स्थानीय कलाकारों द्वारा शानदार सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी जाएंगी। पारंपरिक लोकगीतों और लोकनृत्यों के जरिए पर्यटकों को कैमूर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से रूबरू कराया जाएगा। इससे स्थानीय कलाकारों को अपनी कला दिखाने का बेहतरीन मंच मिलेगा और क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।
वन विभाग की अपील और भविष्य की उम्मीदें
कैमूर वन प्रमंडल भभुआ के डीएफओ संजीव रंजन के अनुसार, कैमूर के जलप्रपात जिले की अमूल्य प्राकृतिक धरोहर हैं। ‘धारा महोत्सव’ के जरिए इन स्थलों की खूबसूरती को वैश्विक पटल पर ले जाने के साथ-साथ जंगल, जल और वन्यजीवों के संरक्षण का संदेश दिया जाएगा। इससे पर्यटकों को कैमूर की प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक विरासत को बेहद करीब से जानने का अवसर मिलेगा।
वन विभाग ने क्षेत्र के आम नागरिकों, विद्यार्थियों, पर्यटकों, प्रकृति प्रेमियों और मीडिया प्रतिनिधियों से अपील की है कि वे अधिक से अधिक संख्या में इस महोत्सव में शामिल हों और इसे सफल बनाएं।

