पटना। बिहार में मानसून की रफ्तार फिलहाल धीमी पड़ गई है। मौसम विज्ञान केंद्र के मुताबिक राज्य में अगले कुछ दिनों तक बारिश की गतिविधियां कमजोर रहने की संभावना है। मंगलवार को प्रदेश के किसी भी जिले के लिए बारिश को लेकर कोई अलर्ट जारी नहीं किया गया है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि 3 अक्टूबर तक मौसम सामान्य रहने की संभावना है, हालांकि इस दौरान लोगों को गर्मी के साथ उमस परेशान कर सकती है। मौसम में बदलाव के बीच अधिकतम तापमान में करीब 3 डिग्री तक बढ़ोतरी होने का अनुमान है। इस मानसूनी सीजन में बिहार में अब तक सामान्य से करीब 31 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। बारिश की कमी के बीच धूप निकलने से दिन का तापमान बढ़ने की संभावना है। वातावरण में नमी मौजूद रहने के कारण तापमान बढ़ने के साथ उमस का असर भी ज्यादा महसूस होगा।

उमस बढ़ने के पीछे 3 बड़े कारण

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार बिहार में फिलहाल मानसूनी गतिविधियां कमजोर हैं। बारिश कराने वाले सिस्टम का असर राज्य पर सीमित होने के कारण कई इलाकों में बादल तो नजर आ सकते हैं, लेकिन पर्याप्त बारिश नहीं हो रही है।दूसरा कारण बारिश की कमी और धूप है। बारिश कम होने से दिन का तापमान बढ़ेगा। तापमान बढ़ने के साथ वातावरण में मौजूद नमी लोगों को ज्यादा उमस महसूस कराएगी। वहीं, पूर्वी उत्तर प्रदेश के ऊपर एक वायुमंडलीय चक्रवात बना हुआ है। उत्तर-पश्चिम और उससे सटे पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी में भी मौसमी गतिविधियां बनी हुई हैं, लेकिन इनका बिहार पर फिलहाल सीमित प्रभाव दिखाई दे रहा है।

पटना में आंशिक बादल

पटना में मंगलवार को मौसम सामान्य रहने की संभावना है। आसमान में आंशिक बादल छाए रह सकते हैं, लेकिन बारिश की गतिविधि कमजोर रहने का अनुमान है। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक 30 सितंबर से 3 अक्टूबर तक राज्य में बारिश की संभावना कम है। 1 अक्टूबर से मौसम के शुष्क रहने की संभावना है। इस दौरान तापमान बढ़ने के साथ दिन में गर्मी और उमस बढ़ सकती है।

सिस्टम म्यांमार की ओर बढ़ा

उत्तर अंडमान सागर और उससे सटे म्यांमार तट के ऊपर बना दबाव वाला क्षेत्र उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ रहा है। 28 सितंबर की सुबह यह सिस्टम म्यांमार तट के करीब था और रात तक म्यांमार तट को पार कर गया। इसके बाद इसके उत्तर-पूर्वी बंगाल की खाड़ी और बांग्लादेश तट की ओर बढ़ने की संभावना जताई गई है। फिलहाल इसका बिहार के मौसम पर बड़ा प्रभाव दिखाई नहीं दे रहा है।

बगहा में टूटा चंपारण तटबंध

मौसम के बीच पश्चिम चंपारण में बाढ़ की स्थिति चिंता बढ़ा रही है। सोमवार रात करीब 8:30 बजे बगहा-1 प्रखंड के खैरटवा गांव के पास गंडक नदी के बढ़ते दबाव के कारण चंपारण तटबंध टूट गया। तटबंध टूटते ही नदी का पानी तेजी से आसपास के गांवों और निचले इलाकों की ओर फैलने लगा। पानी नेशनल हाईवे-727 तक पहुंच गया है, जिससे आवागमन प्रभावित हुआ है। वहीं, चखनी रजवटिया से रतवल जाने वाला करीब 14 किलोमीटर लंबा मार्ग भी इसी तटबंध पर बना हुआ है। तटबंध टूटने के बाद इस मार्ग पर आवागमन बंद कर दिया गया है।

लगातार नजर रखी जा रही

स्थानीय स्तर पर आशंका जताई जा रही है कि तटबंध टूटने से 50 हजार से अधिक आबादी प्रभावित हो सकती है। खैरटवा, पिपरिया, सिंगारी गढ़वा, रजवटिया, चखनी, बड़गांव, छोटकीपट्टी, एकडेरवा और डुमरिया समेत कई गांवों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। तटबंध टूटने की सूचना के बाद प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। अभियंताओं की टीम ने तटबंध को दुरुस्त करने का काम शुरू कर दिया है। प्रशासन की ओर से प्रभावित इलाकों की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।

मुख्यमंत्री ने मोतिहारी में किया एरियल सर्वे

इधर, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मोतिहारी में बाढ़ प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वे किया। उन्होंने हेलीकॉप्टर से डुमरिया घाट, संग्रामपुर, अरेराज समेत बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का जायजा लिया। इस दौरान बाढ़ की स्थिति और प्रभावित इलाकों की स्थिति की जानकारी ली गई।

82 हजार आबादी प्रभावित

आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार पश्चिम चंपारण और सुपौल जिले के 11 प्रखंडों की 23 ग्राम पंचायतों की करीब 82 हजार आबादी बाढ़ से सीधे प्रभावित हुई है। पश्चिम चंपारण के 10 प्रखंडों के कई गांवों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर चुका है। बगहा-वाल्मीकिनगर हाईवे पर करीब 5 से 6 फीट पानी बह रहा है। इससे इस मार्ग पर आवागमन पूरी तरह प्रभावित हो गया है। प्रशासन की ओर से लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है।

मुजफ्फरपुर में 2 लाख आबादी का संपर्क प्रभावित

मुजफ्फरपुर जिले के कटरा में बागमती नदी का पानी बकुची पुल पर पहुंच गया है। इसके कारण 16 पंचायतों की करीब 2 लाख आबादी का प्रखंड मुख्यालय से संपर्क प्रभावित हुआ है। कटौझा में बागमती नदी खतरे के निशान से करीब 0.90 मीटर ऊपर बह रही है। वहीं, मधुबनी के जयनगर में कमला नदी का जलस्तर 68.10 मीटर तक पहुंच गया है। खगड़िया के चौथम प्रखंड में कोसी नदी का पानी करीब 3 फीट तक बढ़ गया है। फिलहाल बिहार में एक तरफ मानसून की गतिविधियां कमजोर पड़ने से बारिश के आसार कम हैं, तो दूसरी तरफ कई जिलों में नदियों के बढ़े जलस्तर और तटबंध टूटने से बाढ़ की स्थिति बनी हुई है। पश्चिम चंपारण में चंपारण तटबंध टूटने के बाद प्रशासन और अभियंताओं की टीम राहत एवं बचाव तथा तटबंध की मरम्मत में जुटी है।