वीरेंद्र कुमार, नालंदा। जिले के मुख्यालय बिहारशरीफ में विजयादशमी के पावन अवसर पर भक्ति, श्रद्धा और मानवीय भावनाओं का अद्भुत संगम देखने को मिला। दस दिनों तक चले शक्ति स्वरूपा मां दुर्गा के पूजन-अर्चन के बाद श्रद्धालुओं ने भारी मन और नम आंखों से मां को अंतिम विदाई दी। विदाई के क्षणों में एक तरफ जहां श्रद्धालुओं की आंखें छलक पड़ीं, वहीं दूसरी ओर ‘मां दुर्गा के जयकारों’ से पूरा शहर गुंजायमान हो उठा।
शहर के विभिन्न पूजा पंडालों से निकला विसर्जन जुलूस
बिहारशरीफ के लगभग सभी प्रमुख मोहल्लों में प्रतिमा विसर्जन को लेकर अभूतपूर्व उत्साह देखा गया। शहर के बिचली खंदक, पुलपर, भैंसासुर, नवाब रोड, भरावपर, रामचंद्रपुर, अंबेर मोड़, मोहद्दीनगर, एतवारी बाजार, मोगलकुआं, जलालपुर, सोहसराय और सोहसराय अड्डा जैसे क्षेत्रों में विसर्जन जुलूस निकाले गए। पारंपरिक ढोल-नगाड़ों, बैंड-बाजे और मां के भक्ति गीतों की धुन पर श्रद्धालु झूमते और नाचते हुए आगे बढ़ते रहे। जगह-जगह पर स्थानीय निवासियों द्वारा मां की प्रतिमाओं पर फूलों की वर्षा कर भावभीनी विदाई दी गई।




’अगले बरस तुम जल्दी आना’ की गूंज
विसर्जन स्थलों की ओर बढ़ती प्रतिमाओं के साथ चल रहे भक्तजन मां से सुख, शांति और समृद्धि की प्रार्थना कर रहे थे। विदाई का यह क्षण बेहद भावुक कर देने वाला था। श्रद्धालुओं ने नम आंखों के साथ मां दुर्गा से अगले वर्ष पुनः आगमन की कामना की। भक्ति और आस्था का यह दृश्य दर्शाता है कि मां दुर्गा की विदाई महज एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि अटूट विश्वास का पर्व है।
शांतिपूर्ण आयोजन और पुलिस-प्रशासन की सराहना
विभिन्न पूजा समितियों के पदाधिकारियों ने जानकारी दी कि इस वर्ष दुर्गा पूजा का महोत्सव अत्यंत शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। समितियों ने जिला पुलिस और प्रशासन की सजगता तथा सहयोग की भूरि-भूरि प्रशंसा की। अधिकारियों और पुलिस बल की मुस्तैदी के कारण पूरे शहर में कानून-व्यवस्था पूरी तरह दुरुस्त रही।
आपसी भाईचारे और सौहार्द का संदेश
पूजा समितियों ने आम नागरिकों और श्रद्धालुओं से अपील की कि वे इस महान पर्व की भावना को बनाए रखते हुए आपस में प्रेम, सौहार्द और भाईचारा कायम रखें। उन्होंने कहा कि त्योहार हमारी सांस्कृतिक एकजुटता का प्रतीक हैं, इसलिए विसर्जन के दौरान भी शांति और अनुशासन बनाए रखना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।

