BJP सांसद संतोष पांडेय का भूपेश सरकार पर पलटवार, कहा- यह समय राजनीति करने का नहीं

CM भूपेश बघेल ने कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों पर कहा था कि देश मे इंटरनेशनल फ्लाइट बंद करने मोदी सरकार ने देरी से लिया निर्णय, वक्त रहते लिया जाता, तो हालात कुछ और होते. बघेल ने यह भी कहा था कि बगैर तैयारी देश में लागू कर दिया गया लाॅकडाउन

रायपुर- कोरोना वायरस संक्रमण के बढ़ते मामलों के बीच बीजेपी ने मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा है यह समय राजनीति करने का नहीं है. दरअसल बीजेपी की यह नसीहत भूपेश बघेल के उस बयान के बाद सामने आई है, जिसमें उन्होंने मौजूदा हालात के लिए केंद्र सरकार पर हमला बोलते हुए कहा था कि इंटरनेशनल फ्लाइट को बंद करने में देरी की गई, यदि यह निर्णय वक्त पर ले लिया जाता तो हालात कुछ और होते. बघेल ने मोदी सरकार पर बगैर तैयारी लाकडाउन किए जाने का भी आरोप लगाया था.

मुख्यमंत्री के इन बयानों के बाद बीजेपी सांसद संतोष पांडेय ने कहा है कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि जिस वक्त केंद्र और राज्य के बीच समन्वय के साथ एकजुट होकर काम करने की जरूरत है, उस वक्त ऐसे बयान के जरिए राजनीति की जा रही है. पांडेय ने कहा कि जिस वायरस के असर को अमेरिका जैसा देश नहीं समझ पाया, समूचा विश्व भ्रमित रहा, ऐसे वक्त में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साहसिक कदम उठाकर देश में लाॅकडाउन घोषित किया था. इस निर्णय का ही असर रहा है कि इटली, स्पेन, अमेरिका जैसे देशों को कोरोना ने तबाह कर रखा है, वहीं भारत में इस पर लगाम लगाया जा सका है. डब्ल्यूएचओ ने भी इसकी प्रशंसा की है.

संतोष पांडेय ने कहा कि इंटरनेशनल फ्लाइट को बंद करने में देरी बताने वाले मुख्यमंत्री की जानकारी में शायद यह तथ्य नहीं है कि उनकी पार्टी के विधायक ने केंद्र सरकार को चिट्ठी लिखकर कीर्गिस्तान में फंसे अपने बेटे को भारत लाने की मांग की थी. यह मांग उस वक्त की गई थी, जब फ्लाइट्स पर प्रतिबंध लगाया जा चुका था. ऐसे में क्या विधायक का पत्र लिखा जाना भी गलता था?

तबलीगी जमात का सेफ जोन बन गया है छत्तीसगढ़

राज्य में तबलीगी जमात के सात लोगों में कोरोना पाॅजिटिव पाए जाने के मामले में भी बीजेपी सांसद संतोष पांडेय ने सरकार पर सवाल उठाया. उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ तबलीगी जमात का सेफ जोन बनता नजर आ रहा है. राज्य के विभिन्न हिस्सो में जमात के जिन लोगों को क्वारंटाइन पर रखा गया है, वह खुलेआम घूम रहे हैं. किसी तरह की निगरानी उन पर नहीं है. इसकी जांच होनी चाहिए. आखिर जिन्हें क्वारंटाइन किया गया है, वह बाजार में घूम कैसे रहे हैं. कवर्धा जिले में बाहर से आने वाले मुसाफिरों की मुसाफिरी लिखी जानी चाहिए. सरकार इस चुनौती को स्वीकार करे. दूसरों के जीवन से खिलवाड़ ना करे.

 

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