बक्सर। जिले से एक बड़ी और चौंकाने वाली चोरी की घटना सामने आई है। शहर के व्यस्त और संवेदनशील इलाके में स्थित एक चर्चित मोबाइल दुकान को चोरों ने अपना निशाना बनाया। हैरानी की बात यह है कि यह वारदात ठीक उस जगह के पास हुई, जहां दशहरा मेले की सुरक्षा और निगरानी के लिए पुलिस कंट्रोल सेंटर बनाया गया था। चोरों ने दुकान का शटर तोड़कर लाखों रुपये के महंगे स्मार्टफोन्स और नकदी पर हाथ साफ कर दिया, जिससे स्थानीय व्यापारियों में भारी रोष और दहशत का माहौल है।
शटर तोड़कर दुकान के अंदर घुसे चोर
यह सनसनीखेज मामला बक्सर के स्टेशन रोड का है। पीड़ित दुकान मालिक दीपक कुमार के अनुसार, चोरों ने सोमवार देर रात इस वारदात को अंजाम दिया। बैंक बंद होने के कारण पिछले दो दिनों की कुल बिक्री का करीब 3 लाख रुपये नकद दुकान के भीतर ही रखा हुआ था। चोरों ने न केवल इस नकदी को चुराया, बल्कि दर्जनों ब्रांडेड आईफोन और अन्य महंगे स्मार्टफोन भी अपने साथ ले गए। दुकान के खाली डिब्बों और स्टॉक का मिलान करने के बाद दुकानदार ने कुल चोरी का अनुमान लगभग 40 लाख रुपये लगाया है।
पुलिस कंट्रोल सेंटर से महज 150 मीटर की दूरी पर वारदात
स्थानीय लोगों और कारोबारियों के बीच सबसे बड़ा चिंता का विषय यह है कि यह चोरी पुलिस कंट्रोल सेंटर से मात्र 150 मीटर की दूरी पर हुई। दशहरा मेले के मद्देनजर सुरक्षा के पुख्ता दावों के बीच इतनी बड़ी घटना होना पुलिसिया व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। वारदात के वक्त की सीसीटीवी फुटेज सामने आई है, जिसमें रात करीब ढाई बजे एक नकाबपोश चोर आसानी से शटर उठाकर दुकान के अंदर दाखिल होता नजर आ रहा है।
फुटेज में देखा जा सकता है कि चोर ने बड़ी सफाई से डिब्बों से महंगे मोबाइल निकालकर अपने थैले में भरे और फिर स्क्रू ड्राइवर की मदद से कैश काउंटर का लॉक तोड़कर नकदी निकाल ली। पुलिस का मानना है कि इस घटना को अकेले अंजाम नहीं दिया गया है, बल्कि चोर के अन्य साथी बाहर पहरा दे रहे थे।
पुलिस की जांच और कार्रवाई
घटना की सूचना मिलते ही थानाध्यक्ष संजय कुमार सिन्हा तुरंत पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। पुलिस ने दुकान और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगालने शुरू कर दिए हैं ताकि आरोपियों की पहचान की जा सके। थानाध्यक्ष ने इस मामले का जल्द से जल्द उद्भेदन करने और चोरों को सलाखों के पीछे भेजने का दावा किया है। हालांकि, इस खबर के लिखे जाने तक पुलिस थाने में आधिकारिक रूप से प्राथमिकी (FIR) दर्ज होने की पुष्टि नहीं हुई थी।

