दिल्ली-NCR में औद्योगिक प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने निगरानी व्यवस्था सख्त कर दी है। आयोग ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में प्रदूषण फैलाने वाली औद्योगिक इकाइयों को 30 नवंबर 2026 तक पैन-टिल्ट-जूम (PTZ) कैमरे लगाने और उन्हें चालू करने के निर्देश दिए हैं। इस व्यवस्था के जरिए औद्योगिक इकाइयों में प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े इंतजामों की रियल टाइम निगरानी की जाएगी।

कैमरों से होगी प्रदूषण की रियल टाइम निगरानी

CAQM के निर्देशों के अनुसार, PTZ कैमरों की मदद से औद्योगिक इकाइयों में इस्तेमाल होने वाले ईंधन, चिमनियों से निकलने वाले धुएं और प्रदूषण नियंत्रण के लिए किए गए उपायों पर नजर रखी जाएगी। इससे संबंधित एजेंसियों को औद्योगिक गतिविधियों की निगरानी करने और नियमों के उल्लंघन की स्थिति में समय रहते कार्रवाई करने में मदद मिलेगी।

30 नवंबर तक पूरा करना होगा काम

आयोग ने औद्योगिक इकाइयों को निर्धारित समयसीमा के भीतर कैमरे लगाने के साथ उन्हें चालू करने का निर्देश दिया है। इसका उद्देश्य प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों पर निगरानी बढ़ाना और औद्योगिक इकाइयों में पर्यावरण संबंधी नियमों का पालन सुनिश्चित करना है। दिल्ली-NCR में औद्योगिक उत्सर्जन वायु प्रदूषण की प्रमुख चिंताओं में शामिल है।

इन औद्योगिक इकाइयों पर लागू होंगे निर्देश

CAQM की ओर से 15 अक्टूबर को जारी आदेश के मुताबिक, PTZ कैमरे लगाने के निर्देश NCR में प्रदूषण फैलाने वाली औद्योगिक इकाइयों की निर्धारित श्रेणियों पर लागू होंगे। इनमें केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) की ओर से चिन्हित अत्यधिक प्रदूषणकारी उद्योगों की सभी 17 श्रेणियां शामिल हैं। इसके अलावा, रेड कैटेगरी के मध्यम और बड़े वायु प्रदूषणकारी उद्योगों को भी इस व्यवस्था के दायरे में रखा गया है। बॉयलर या थर्मिक फ्लूड हीटर का इस्तेमाल करने वाले खाद्य प्रसंस्करण और कपड़ा उद्योगों के साथ भट्ठियां संचालित करने वाले धातु उद्योगों को भी निर्धारित समयसीमा तक कैमरे लगाने और चालू करने होंगे।

ईंधन के इस्तेमाल से लेकर चिमनियों तक होगी निगरानी

CAQM के आदेश के तहत औद्योगिक इकाइयों को बॉयलर, थर्मिक फ्लूड हीटर, भट्ठियों और अन्य ईंधन आधारित उपकरणों में ईंधन डालने वाले स्थानों पर PTZ कैमरे लगाने होंगे। गैस से संचालित औद्योगिक इकाइयों में गैस मीटर और उससे जुड़े उपकरणों को भी कैमरों की निगरानी के दायरे में रखना अनिवार्य होगा। इसके अलावा, चिमनियों से निकलने वाले धुएं और अन्य उत्सर्जन पर भी नजर रखी जाएगी। ऑनलाइन कंटीन्यूअस एमिशन मॉनिटरिंग सिस्टम (OCEMS) के सैंपलिंग प्वाइंट और जहां लागू हो, वहां फ्यूम एक्सट्रैक्शन सिस्टम की गतिविधियों की निगरानी भी कैमरों के जरिए की जाएगी।

CPCB और प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों को मिलेगी लाइव फीड

CAQM के आदेश के मुताबिक, औद्योगिक इकाइयों में लगाए जाने वाले सभी PTZ कैमरों की वीडियो फीड की लगातार और रियल टाइम स्ट्रीमिंग केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB), संबंधित राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों और दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) के निर्धारित सर्वर या पोर्टल पर करनी होगी। कैमरों की तस्वीरें रात के समय औद्योगिक गतिविधियों के दौरान भी स्पष्ट होनी चाहिए, ताकि निगरानी में कोई बाधा न आए। आदेश में यह भी कहा गया है कि यदि निर्धारित कैमरों से औद्योगिक इकाई के सभी निगरानी वाले स्थानों को कवर करना संभव नहीं होता है, तो जरूरत के अनुसार अतिरिक्त कैमरे लगाने होंगे। इसका उद्देश्य ईंधन के इस्तेमाल से लेकर प्रदूषण नियंत्रण उपकरणों के संचालन तक की गतिविधियों पर प्रभावी नजर रखना है।

बिजली और तकनीकी व्यवस्था बनाए रखना होगा जरूरी

औद्योगिक इकाइयों को कैमरों और वीडियो ट्रांसमिशन की व्यवस्था के लिए निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करनी होगी। इसके साथ ही बिजली बाधित होने की स्थिति में निगरानी व्यवस्था चालू रखने के लिए पावर बैकअप की सुविधा भी उपलब्ध करानी होगी। यदि कैमरों या वीडियो ट्रांसमिशन में लंबे समय तक खराबी आती है, तो संबंधित औद्योगिक इकाई को इसकी जानकारी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को देनी होगी। साथ ही, समस्या को दूर करने के लिए की गई सुधारात्मक कार्रवाई का विवरण भी उपलब्ध कराना होगा।

पहले के आदेश का दायरा बढ़ाया

वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने औद्योगिक इकाइयों में प्रदूषण की निगरानी को लेकर अपने पहले के आदेश का दायरा बढ़ा दिया है। आयोग ने इससे पहले 5 अक्टूबर 2026 को कुछ औद्योगिक क्षेत्रों में ईंधन भंडारण स्थलों, ईंधन डालने के स्थानों और गैस मीटरिंग पॉइंट पर अतिरिक्त पैन-टिल्ट-जूम (PTZ) कैमरे लगाने के निर्देश दिए थे। अब आदेश संख्या 98 के तहत आने वाली सभी संबंधित औद्योगिक श्रेणियों को इस निगरानी व्यवस्था में शामिल किया गया है।

सर्दियों में प्रदूषण पर नजर रखने की तैयारी

CAQM के अनुसार, सर्दियों के दौरान प्रतिकूल मौसम परिस्थितियों के कारण प्रदूषक हवा में लंबे समय तक बने रह सकते हैं। ऐसे में औद्योगिक इकाइयों की दूर से निगरानी करने के लिए PTZ कैमरों का इस्तेमाल महत्वपूर्ण होगा। इससे नियमों के उल्लंघन का समय रहते पता लगाने के साथ स्वीकृत ईंधन के इस्तेमाल और प्रदूषण नियंत्रण मानकों के अनुपालन की जांच करने में मदद मिलेगी। आयोग ने इस आदेश को लागू कराने की जिम्मेदारी दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान की सरकारों के साथ केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) तथा संबंधित राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों को सौंपी है। दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) भी निगरानी व्यवस्था में शामिल होगी।

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