Automobile Desk: देशभर में त्योहारों का मौसम शुरू होते ही कार बाजार में रौनकों का दौर वापस आ गया है। शोरूम्स पर ग्राहकों की भारी आवाजाही और नए वाहनों के लिए हो रही मजबूत बुकिंग से वाहन निर्माता कंपनियां बेहद उत्साहित हैं। हालांकि, इस बार बाजार की असली चुनौती मांग की नहीं, बल्कि गाड़ियों की उपलब्धता और सप्लाई चेन को बनाए रखने की है। भारत के लगभग 85 प्रतिशत से अधिक कार बाजार पर कब्जा रखने वाली शीर्ष पांच वाहन कंपनियों के सामने मांग के अनुरूप स्टॉक जुटाना एक बड़ी पहेली बन चुका है।

ऑटो इंडस्ट्री के लिए अक्टूबर और नवंबर का महीना पूरे साल का सबसे अहम वक्त माना जाता है, क्योंकि सालभर की कुल कारों की बिक्री का लगभग एक-तिहाई हिस्सा इसी फेस्टिव सीजन में निकलता है। इस बार नवरात्रि से लेकर दिवाली तक चलने वाले मुख्य त्योहारी चरण में गाड़ियों की बिक्री का पूरा दारोमदार इस बात पर निर्भर करेगा कि कंपनियां कितनी जल्दी अपने शोरूम्स तक गाड़ियां पहुंचा पाती हैं।

देश की सबसे बड़ी कार निर्माता मारुति सुजुकी इस समय गाड़ियों की भारी किल्लत से जूझ रही है। कंपनी के पास वर्तमान में 2 लाख से अधिक गाड़ियों की पेंडिंग बुकिंग है, जबकि डीलर्स के पास औसतन केवल 16 दिनों की बिक्री के बराबर का ही बैकअप बचा है। सामान्य दिनों में त्योहारी सीजन के दौरान मारुति के डीलर्स कम से कम एक महीने का इन्वेंट्री स्टॉक रखकर चलते हैं। उत्पादन बढ़ाने के लिए नई ऑटोमेटेड मैन्युफैक्चरिंग लाइन पर काम जारी है, लेकिन इसके पूरी तरह स्थिर होने में दिसंबर तक का समय लग सकता है। इसके अलावा, त्योहारी छुट्टियों के कारण प्लांट्स में वर्किंग डेज कम होना भी उत्पादन रफ्तार को धीमा कर रहा है।

सप्लाई की यह किल्लत केवल पेट्रोल-डीजल गाड़ियों तक सीमित नहीं है, बल्कि इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) सेगमेंट में स्थिति और भी ज्यादा गंभीर है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की बदलती कीमतों के कारण अचानक से ईवी कारों की मांग में तेजी आई है। अचानक बढ़ी इस मांग को पूरा करने के लिए कंपनियां अपनी बैटरी और पार्ट्स की सप्लाई चेन को समय पर दुरुस्त नहीं कर पा रही हैं, जिससे ईवी खरीदारों को लंबा वेटिंग पीरियड देखना पड़ रहा है।

Hyundai Motor India की बात करें तो कंपनी ने त्योहारी सीजन के मुख्य दौर के लिए लगभग 4 से 5 सप्ताह की इन्वेंट्री तैयार कर रखी है। अपनी सप्लाई को और मजबूत करने के लिए हुंडई अपने तलेगांव प्लांट में तीसरी शिफ्ट शुरू करने पर तेजी से काम कर रही है, ताकि आगामी मिड-साइज़ एसयूवी और अन्य मॉडलों की डिलीवरी में रुकावट न आए। फिर भी, उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले साल के उच्च बिक्री स्तर (हाई बेस) को देखते हुए इस साल की दूसरी छमाही में कुल इंडस्ट्री की ग्रोथ 5 से 6 प्रतिशत के आसपास ही सिमट सकती है।

इसी तरह Tata Motors को भी इस दौरान अपनी रिटेल बिक्री में बढ़त की पूरी उम्मीद है, भले ही प्रतिशत के लिहाज से ग्रोथ का आंकड़ा पिछले साल से थोड़ा कम नजर आए। फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशंस (FADA) के अनुसार, इस साल त्योहारों का कैलेंडर काफी बिखरा हुआ है—ओणम, गणेश चतुर्थी, नवरात्रि और दिवाली अलग-अलग महीनों में पड़ने से बिक्री के आंकड़ों का सीधा आकलन करना कठिन है। इसके बावजूद, अगर कंपनियां समय रहते अपनी सप्लाई बढ़ा लेती हैं, तो यह फेस्टिव सीजन कार बाजार के लिए एक नया कीर्तिमान स्थापित कर सकता है।