अजय सैनी, भिवानी. स्थानीय चौधरी बंसीलाल विश्वविद्यालय में निर्माण कार्यों और विभिन्न मदों के नाम पर करोड़ों रुपये के कथित बिना मंजूरी व नियम विरुद्ध एडवांस भुगतान का मामला गर्माता जा रहा है। एनएसयूआई ने विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। वीरवार को एनएसयूआई पदाधिारियों ने जिला अध्यक्ष अक्षित घणघस के नेतृत्व में विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. दीप्ति धर्माणी के नाम ज्ञापन सौंपकर इस पूरे प्रकरण की स्वतंत्र व निष्पक्ष जांच करवाने तथा दोषियों पर सख्त कार्रवाई करने की पुरजोर मांग उठाई।
विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा एजेंसी को 31 किस्तों में लगभग 182.77 करोड़ का एडवांस भुगतान नियम ताक पर रखकर कर दिया गया। इसके अतिरिक्त, विभिन्न अध्यापकों, अधिकारियों व शाखाओं को दिए गए लगभग 4.58 करोड़ के एडवांस फंड का भी कोई हिसाब-किताब उपलब्ध नहीं है। इतना ही नहीं, अन्य एजेंसियों जैसे एनएचएआई, बिजली निगम और हुडा को भी करोड़ों रुपये का अग्रिम भुगतान बिना उचित प्रक्रियाओं के किया गया है।
इस मौके पर एनएसयूआई जिला अध्यक्ष अक्षित घणघस ने कहा कि विश्वविद्यालय में सार्वजनिक धन और छात्रों के हितों के साथ खिलवाड़ कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। 182.77 करोड़ का बिना मंजूरी एडवांस भुगतान और 4.58 करोड़ के एडवांस खर्च का हिसाब न होना एक बेहद गंभीर विषय है। हमारी किसी व्यक्ति विशेष से कोई व्यक्तिगत रंजिश नहीं है, लेकिन सार्वजनिक धन का उपयोग पूरी पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ होना चाहिए। यदि प्रशासन जल्द ही इस मामले में स्वतंत्र जांच बिठाकर स्थिति स्पष्ट नहीं करता है, तो एनएसयूआई छात्रों के साथ मिलकर बड़े स्तर पर आंदोलन करने को मजबूर होगी।
इस मौके पर छात्र नेता सुमित बराड़ ने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि जहां एक तरफ छात्रों को मूलभूत सुविधाओं के लिए तरसना पड़ता है, वहीं दूसरी तरफ विश्वविद्यालय का करोड़ों रुपये का बजट एडवांस में बांट दिया जाता है। टेंडर प्रक्रिया, वर्क ऑर्डर, बिल और माप पुस्तिका की गहन जांच होनी चाहिए। अगर ऑडिट में आपत्तियां आई हैं, तो केवल कागजी लीपापोती करने के बजाय जिम्मेदारों की जवाबदेही तय कर उन पर प्रशासनिक व कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।
छात्र नेता प्रवीण बूरा ने कहा कि निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, उनके वास्तविक भौतिक कार्य और किए गए भुगतानों के मिलान का विशेष ऑडिट कराया जाना बेहद जरूरी है। जब तक इस पूरे घोटाले की जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक विश्वविद्यालय प्रशासन को सभी संबंधित रिकॉर्ड और फाइलों को पूरी तरह सुरक्षित रखना चाहिए ताकि किसी भी तरह की छेड़छाड़ न हो सके। जांच की पूरी रिपोर्ट को विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट पर सार्वजनिक किया जाए ताकि आमजन और छात्रों को सच का पता चल सके।
मांगपत्र के माध्यम से एनएसयूआई ने मांग की कि 182.77 करोड़ के कथित एडवांस भुगतान की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए और पूरी प्रक्रिया सार्वजनिक की जाए। टेंडर, वर्क ऑर्डर, एग्रीमेंट, बिल और माप पुस्तिका की गहनता से पड़ताल हो। 4.58 करोड़ के लापता हिसाब का ब्योरा प्रशासन तुरंत सार्वजनिक करे। बिजली कनेक्शन, वाटर पाइपलाइन और लिफ्ट एएमसी के नाम पर दिए गए अग्रिम भुगतानों की जांच की जाए। जांच पूरी होने तक सभी रिकॉर्ड सुरक्षित रखे जाएं और जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए। इस अवसर पर देवेंद्र, विक्रम, सौरभ, इशांत, रमन, अंकित, आर्यन, अंकुर, मोहित, सचिन, गौतम, मोंटी, अमन, बसंत सहित अन्य छात्र भी मौजूद रहे।
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