परवेज आलम, बेतिया। पश्चिम चंपारण के लोकसभा सचेतक और भाजपा सांसद डॉ. संजय जायसवाल ने बेतिया स्थित अपने आवास पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया। उन्होंने चंपारण में आई भीषण बाढ़ की स्थिति, इसके कारणों और सरकार द्वारा राहत एवं बचाव कार्यों की विस्तार से जानकारी दी। सांसद ने स्पष्ट किया कि प्रशासन स्थिति पर पूरी तरह नजर बनाए हुए है और पीड़ितों को हरसंभव सहायता पहुंचाई जा रही है।

​बाढ़ का मुख्य कारण: नेपाल में टूटे डैम और रिकॉर्ड जलस्तर

​डॉ. जायसवाल ने बताया कि चंपारण में आई बाढ़ पूरी तरह से अप्रत्याशित थी। इसका मुख्य कारण एक महीने पहले नेपाल में हुई भारी तबाही थी, जहां त्रिशुली नदी में नेपाल के 13 डैम बह गए थे। इन डैमों में पानी का स्टोरेज होता था और बिजली बनाई जाती थी। इसके अलावा, हाल ही में नेपाल और चंपारण में हुई लगातार मूसलाधार बारिश के कारण गंडक नदी का जलस्तर अचानक बहुत अधिक बढ़ गया।
​वाल्मीकिनगर गंडक बराज का जलस्तर इस बार सभी पुराने आंकड़ों को पार करते हुए अपने उच्चतम स्तर से भी 35 सेंटीमीटर ऊपर पहुंच गया। कल रात्रि शिवराजपुर में एक गंभीर स्थिति पैदा हो गई, जब 9 लाख क्यूसेक से अधिक पानी छोड़ा गया। हालांकि, बिहार सरकार के जल संसाधन विभाग के सचिव ने तुरंत मामले का संज्ञान लिया और विभाग के माध्यम से सभी प्रभावित क्षेत्रों में कार्रवाई सुनिश्चित कराई गई।

​आवागमन के लिए वैकल्पिक व्यवस्था और तटबंधों की मरम्मत

​सांसद ने भरोसा दिलाया कि जैसे ही बाढ़ का पानी उतरेगा, चंपारण के सभी टूटे हुए तटबंधों की मरम्मत का कार्य युद्ध स्तर पर शुरू कर दिया जाएगा। तब तक स्थानीय ग्रामीण जनता को आवागमन में कोई परेशानी न हो, इसके लिए युद्ध स्तर पर वैकल्पिक व्यवस्थाएं कराई जा रही हैं ताकि जनजीवन सामान्य हो सके।

​राहत सामग्री, कम्युनिटी किचन और वित्तीय सहायता

​बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए सरकार और प्रशासन पूरी मुस्तैदी से काम कर रहे हैं। प्रभावित इलाकों में लगातार कम्युनिटी किचन (सामुदायिक रसोई) चलाए जा रहे हैं। इसके साथ ही, जो लोग तटबंधों (बांध) पर शरण लिए हुए हैं, उन्हें सूखा राशन भी वितरित किया जा रहा है।
​राहत राशि की घोषणा करते हुए डॉ. जायसवाल ने कहा कि आगामी दशहरा पर्व से पहले सभी बाढ़ पीड़ितों के बैंक खातों में सरकार की ओर से 7-7 हजार रुपये की सहायता राशि भेज दी जाएगी। इसके अतिरिक्त, इस बार लागू हुए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत उन सभी किसानों को मुआवजा दिया जाएगा जिनकी फसलें बाढ़ के कारण बर्बाद हुई हैं।