पंकज श्रीवास्तव, छपरा। छपरा नगर निगम में रिश्वतखोरी का एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां टैक्स कलेक्टर के पद पर तैनात एक कर्मचारी ने अपने ही नगर आयुक्त रंजीत कुमार को पीले लिफाफे में रिश्वत देने की कोशिश की। हालांकि, नगर आयुक्त ने रिश्वत लेने के बजाय इसकी सूचना पुलिस को दे दी। सूचना मिलते ही पुलिस ने आरोपी कर्मचारी को गिरफ्तार कर लिया।
दरअसल शहर के भगवान बाजार थाना क्षेत्र अंतर्गत टक्कर मोड सलापतगंज निवासी टैक्स कलेक्टर असगर अली अंसारी के खिलाफ भ्रष्टाचार और अवैध वसूली के कई मामले विचाराधीन थे और विभागीय कार्रवाई चल रही थी। विभागीय कार्रवाई से खुद को बचने की कोशिश में असगर अली एक पीला लिफाफा लेकर कार्यालय पहुंचे और नगर निगम में कार्यरत एक कर्मचारी को पीला लिफाफा थमाते हुए कहा कि, इसे नगर आयुक्त के हाथ में दे दिया जाए। उक्त कर्मचारी ने जब उनसे पूछा कि इस लिफाफे में क्या है? तो असगर अली ने झांसा देते हुए से कहा पटना हाई कोर्ट से जुड़े कुछ अति महत्वपूर्ण कागजात हैं।
उक्त कर्मचारी ने बिना किसी संदेह के लिफाफा नगर आयुक्त रंजीत कुमार के कक्ष में पहुंच कर उनकी मेज पर रख दिया। नगर आयुक्त ने संदेह होने पर पूछा कि इसमें (पीले लिफाफे) क्या है? साथ ही उन्होंने अपने कक्ष मौजूद अन्य कर्मियों और पदाधिकारी के सामने ही उसे खोलने का आदेश दिया, जैसे ही लिफाफा खुल अंदर का नजारा देख सभी कर्मचारी सन्न रह गए।
पिले लिफाफे में कथित अदालती दस्तावेजों की जगह ₹10000 के नोटों की गड्डियां चमक रही थी। नगर आयुक्त रंजीत कुमार यह देखकर आवाक रह गए और उसके बाद उन्होंने बिना समय गंवाए नगर थाना पुलिस को तलब किया। पुलिस टीम ने फौरन निगम कार्यालय पहुंचकर टैक्स कलेक्टर असगर अली को रंगे हाथ दबोच लिया।
सूत्र के अनुसार असगर अली ने अपना गुनाह कबूल कर लिया है। इस मामले में हेड क्लर्क तारकेश्वर मिश्रा ने नगर थाने में नामजद प्राथमिक दर्ज कराई है, जिसमें नगर प्रबंधन वेद प्रकाश वर्णवाल, कनीय अभियंता वरुण कुमार समेत कई कर्मचारी और अधिकारी गवाह बने हैं। घटना के बाद नगर निगम में कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बना रहा। वहीं, इस घटना की पुष्टि एएसपी सारण राम पुकार सिंह ने की है।
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