पुष्पेंद्र कुमार, चरखी दादरी। जिला उपायुक्त कार्यालय से आई एक तस्वीर इन दिनों चर्चा का विषय बनी हुई है, जो प्रशासनिक सजगता और व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े करती है। इस तस्वीर में ‘जिला प्रशासन, चरखी दादरी’ के बोर्ड के नीचे अधिकारी और नागरिक एक पुरस्कार वितरण कार्यक्रम के दौरान खड़े दिखाई दे रहे हैं। लेकिन इस सरकारी तस्वीर के पीछे का एक दूसरा पहलू जनता के बीच गहरी नाराजगी और चिंता का कारण बना हुआ है।
दिखावे में व्यस्त, मूलभूत कार्यों से दूरी?
पत्रकारिता के दृष्टिकोण से जब इस तस्वीर की गहराई से समीक्षा की जाती है, तो यह साफ झलकता है कि जिला प्रशासन केवल औपचारिक कार्यक्रमों और बुधवार या अन्य कार्यदिवसों पर फाइलों को इधर-उधर करने में ही व्यस्त है। सवाल यह उठता है कि जो प्रशासन अपने कार्यालय के भीतर की व्यवस्थाओं और दैनिक कार्यों को सही तरीके से पुनर्गठित या तैयार नहीं कर सकता, वह आम जनता के लिए जिला स्तर पर मूलभूत सुविधाएं कैसे तय कर पाएगा?
आम जन की मूलभूत सुविधाएं हाशिए पर
यह फोटो इस बात की गवाही दे रही है कि एक तरफ जहां कागजों और पुरस्कारों में प्रशासन अपनी पीठ थपथपा रहा है, वहीं दूसरी तरफ जिले की आम जनता आज भी पानी, सड़क, बिजली और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रही है। प्रशासनिक अधिकारियों का ध्यान धरातल पर काम करने के बजाय केवल कार्यालय की चारदीवारी के अंदर फोटो खिंचवाने तक सीमित रह गया है।
बड़ा सवाल: यदि जिला उपायुक्त कार्यालय अपने आंतरिक प्रशासनिक ढांचे और कार्यप्रणाली को चुस्त-दुरुस्त नहीं रख पा रहा है, तो फिर आम जनता को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए किससे उम्मीद रखनी चाहिए?
यह तस्वीर जिला प्रशासन की कार्यशैली पर एक बड़ा सवालिया निशान लगाती है और मांग करती है कि प्रशासन केवल दिखावे से ऊपर उठकर आम जनमानस की मूलभूत आवश्यकताओं को प्राथमिकता दे।
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